अपने जीवन में कभी चुनाव नहीं हारे करुणानिधि

  By : Shubham Srivastawa | August 7, 2018
Karunanidhi was a great opposition to Brahmanism.

चेन्नई। डीएमके प्रमुख एम करुणानिधि नहीं रहे। मंगलवार शाम को उन्होंने चेन्नई स्थित कावेरी अस्पताल में अंतिम सांस ली। तमिलानाडु की राजनीति के भीष्म पितामह कहे जाने वाले करुणानिधि पांच बार सूबे के मुख्यमंत्री रहे। राजनीति में आने से पहले DMK प्रमुख कभी तमिल फिल्मों में स्क्रिप्ट लिखा करते थे। 1924 में थिरुक्कुवालाई गांव में जन्में करुणानिधि बचपन से ही संगीत के शौक़ीन थे और उन्होंने इसके लिए शिक्षा भी ली थी। संगीत सिखने के दौरान ही उन्होंने जातीय भेदभाव का पहला पाठ पढ़ लिया था। ऐसा इसलिए क्योंकि  वह जिस जाति के थे उस जाति को वाद्ययंत्र नहीं सिखाया जाता था।  यह बात उन्हें बुरी लगती थी। ऐसे में उन्होंने अपना रुख राजनीति की ओर किया और  ‘पेरियार’ के ‘आत्मसम्मान आंदोलन’ से जुड़ गए। इसके बाद उन्होंने ‘ ब्राह्मणवाद’ के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया।

जब साल 1937 में तमिलनाडु में हिंदी को अनिवार्य भाषा के तौर पर पढाया जा रहा था तब करुणानिधि ने इसका जमकर विरोध किया था। उस समय उनकी उम्र मात्र 14 साल थी। इस तरह कभी तमिल फिल्मों में स्क्रिप्ट लिखने वाले लेखक करुणानिधि ने महज 14 साल की उम्र में अपने करियर का आगाज राजनीति में कर दिया।

करूणानिधि ने द्रविड़ आंदोलन शुरू करने के पहले छात्र संगठन ‘तमिलनाडु तमिल मनावर मंडलम’ की स्थापना की थी। 10 अगस्त, 1942 को उन्होंने  ‘मुरासोली’ नाम से अखबार शुरू किया। इसके बाद वे कोयम्बटूर में रहकर नाटक के लिए स्क्रिप्ट लिखने लगे। तभी उनकी लेखनीय पर ‘पेरियार’ और ‘अन्नादुराई’ की नजर पड़ी। बता दें कि अन्नादुराई ने दक्षिण भारत की एकता के आधार पर अलग ‘द्रविड़नाडु’ की आवाज उठा दी थी। लेकिन जब देश को आजादी मिली तो पेरियार और अन्नादुराई अलग-अलग हो गये। इसके बाद करुणानिधि अन्नादुराई के साथ उनके रास्ते पर चल पड़े। इस तरह 1949 में दोनों ने मिलाकर नई पार्टी बनाई,  जिसका नाम, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम’ (DMK) रखा गया।  करुणानिधि को पार्टी का कोषाध्यक्ष बनाया गया।

राजनीति में पूरी तरह उतरने के बावजूद भी करुणानिधि ने फिल्मों के लिए स्क्रिप्ट लिखना बंद नहीं किया। साल 1952 में उन्होंने ‘परासाक्षी’ नाम की एक फिल्म भी बनाई। यह फिल्म आर्यन ब्राह्मणवादी विरोधी विचारधारा पर आधारित थी। इसके बाद वे साल 1957 में अपनी पार्टी की ओर से चुनावों में उतरे और पहली बार तमिलनाडु के कुलिथालई क्षेत्र से चुनकर विधानसभा पहुंचे। उस समय वे DMK के टिकट से विधानसभा पहुंचे वाले मात्र 15 विधायकों में से एक थे। इस तरह वर्ष 1967 में उनकी पार्टी पूर्ण बहुमत में आई और अन्नादुराई राज्य के पहले गैर कांग्रेसी मुख्यमंत्री बने।

करुणानिधि की हुई थी तीन शादी

बता दें कि करुणानिधि ने तीन शादी की थी। उनकी पहली पत्नी का नाम पद्मावती अम्माल था। जिनसे एक बेटा हुआ और उसका नाम एमके मुथू रखा गया था। लेकिन जल्द ही उनकी पहली पत्नी और बेटे की मौत हो गयी। इसके बाद उनकी दूसरी शादी दयालु अम्मा से हुई। इनसे चार बच्चे हुए, जिनके नाम एमके अलागिरि, एमके स्टालिन, एमके तमिलारसु और सेल्वी हैं। लेकिन कुछ दिन के बाद दयालु अम्मा की मौत हो गयी। इसके बाद उन्होंने तीसरी शादी राजाथिअम्माल से की।इनसे उनकी एक बेटी कनिमोझी हैं।