बायोग्रॉफी: बना चुके थे राजनीति से सन्यास का मन, अब हैं गुजरात के CM

  By : Team Khabare | December 7, 2017
vijay rupani biography profile

गुजरात की सियासत में बीजेपी का प्रमुख चेहरा बनकर उभरे विजय रूपाणी की अहमीयत का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि, पहली बार विधायक बनने के बाद ही उन्हें राज्य का सीएम बना दिया गया। कानून के विशेष जानकार रूपाणी शुरू से ही संघ से जुड़े रहें और गुजरात में भारतीय जनता पार्टी को मजबूती प्रदान करते रहें। आज वो गुजरात के मुख्यमंत्री हैं और एक बार फिर से गुजरात में उनकी दावेदारी है। तो आइये आज हम आपको विजय रूपाणी के बारे में बताते हैं।

प्रारंभिक जीवन:
विजय रूपाणी का जन्म 2 अगस्त 1956 को रंगून, बर्मा (अब यांगून, म्यांमार) में मायाबेन और रमणिकलाल रूपाणी के घर हुआ था। लेकिन इनके जन्म के महज चार साल के बाद ही बर्मा में राजनीतिक अस्थिरता के चलते इनके पिता अपने परिवार को लेकर वापस राजकोट आ गये। शुरूआती जीवन विजय रूपाणी का बेहद ही सामान्य रहा, उन्होंने धर्मेंद्र सिंह जी कला कॉलेज और सौराष्ट्र विश्वविद्यालय से एलएलबी से कला स्नातक की पढ़ाई की। चूकि विजय रूपाणी का परिवार व्यवसायिक था तो उन्होनें ने भी अपना करियर व्यवसाय से ही शुरू किया। उन्होनें अपने पिता द्वारा शुरू किये गये रसिकलाल एंड संस में भागीदार हो गयें और बतौर स्टॉक ब्रोकर काम किया।

राजनीति में प्रवेश:
विजय रूपाणी के रगो में न केवल व्यापार था बल्कि उनकी रूचि राजनीति में भी थी। इसलिए अपने छात्र जीवन से ही वो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के साथ जुड़े रहे। उस दौर में वो एबीवीपी के सभी कार्यक्रमों में बड़चढ़ कर हिस्सा लेते रहें। कुछ दिनों के बाद वो जनसंघ से टूट कर बनी हुई पार्टी भारतीय जनता पार्टी से जुड़ गयें। जब वो संघ से जुड़े थें उस समय 1976 में इमरजेंशी के दौरान वो 11 महीने के लिए जेल भी गयें। आपको बता दें कि, विजय रूपाणी गुजरात के इकलौते मंत्री हैं जो इमरजेंशी में जेल गये थें।

राजनीति और चुनाव से इनका पहला वास्ता उस वक्त पड़ा जब इन्होनें 1987 में राजकोट में होने वाले नगर निगम चुनाव में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्हें नगर निगम का अध्यक्ष चुना गया। इसके बाद सन 1995 में एक बार फिर से उन्हें राजकोट म्युनिसिपल कार्पोरेशन का अध्यक्ष चुना गया। इसके अलावा उन्हें बड़ा पद सन 1996 में मिला जब उन्हें राजोट का मेयर चुना गया। यही वो दौर था जब विजय रूपाणी पूरी तरह से सक्रिय राजनीति में आ चुके थें।

आजीवन भारतीय जनता पार्टी के साथ रहने वाले रूपाणी को सन 1998 में भाजपा के गुजरात इकाई का महासचिव नियुक्त किया गया। इसके अलावा जब केशुभाई पटेल मुख्यमंत्री बने तो रूपाणी को मेनिफेस्टो कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया। विजय रूपाणी के लिए ये एक बड़ी उपलब्धि थी और साथ ही भारतीय जनता पार्टी में इनके कद में भी विस्तार हुआ। विजय रूपाणी के लिए सबसे बेहतर मौका उस समय हाथ लगा जब इन्होनें 2006 से 2012 तक राज्यसभा की सदस्यता की।

अब रूपाणी गुजरात राज्य में भाजपा के एक बड़े चेहरे के तौर पर उभर रहे थें। एक तरफ देश में जनरल इलेक्शन होने वाले थें। उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी अब अपना पद छोड़कर प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी कर रहे थें। वहीं भाजपा के चाणक्य माने जाने वाले अमित शाह भी अब गुजरात छोड़कर देश की राजधानी पकड़ चुके थें। उस समय रूपाणी का कद गुजरात में बढ़ने लगा।

सन अगस्त 2014 में, गुजरात विधान सभा के पदाधिकारी वजूभाई वाला ने राजकोट पश्चिम से विधायक के रूप में इस्तीफा दे दिया क्योंकि उन्हें कर्नाटक का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। भाजपा ने अपनी खाली सीट से चुनाव लड़ने के लिए विजय रूपाणी को नामित किया और रूपाणी ने इस सीट पर भारी मतों से जीत दर्ज की। जिसके बाद आनंदीबेन पटेल की कैबिनेट में उन्हें, मंत्री के रूप में शामिल किया गया था और उन्होंने परिवहन, जल आपूर्ति, श्रम और रोजगार मंत्रालय दिया गया।

इसके बाद सन 2016 में उन्हें भारतीय जनता पार्टी गुजरात का राज्य अध्यक्ष बनाया गया। 7 अगस्त 2016 से विजय गुजरात के मुख्यमंत्री बनाए गए, इसी के साथ उन्होंने अपने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। आज वो गुजरात के मुख्यमंत्री है और एक बार फिर से गुजरात विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार हैं।

जब राजनीति से हुआ था मोहभंग:
जीवन भर राजनीति में अपना समय बिताने वाले विजय रूपाणी की पत्नी अंजली रूपानी हैं, जो भाजपा महिला विंग के सदस्य भी हैं। इन दोनों से एक बेटी राधिका जिनकी शादी हो गयी है और एक बेटा था पुजित रूपाणी। विजय रूपाणी के जिंदगी में एक दौर वो भी आया जब वो राजनीति से सन्यास लेने का मन बना चुके थें। दरअसल एक हादसे में उनके बेटे पुजित की मौत हो गयी थी। इस हादसे से रूपाणी को काफी गहरा आघात लगा था, और उस सयम वो राजनीति से सन्यास लेने का भी मन बना चुके थें।