एम्बुलेंस का दरवाजा न खुलने पर मासूम की मौत

  By : Bankatesh Kumar | July 18, 2018 7:00 pm
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रायपुर। छत्तीसगढ़ की फ्री एम्बुलेंस सेवा ‘संजीवनी एक्सप्रेस’ 108 का दरवाजा लॉक होने से मंगलवार को एक बच्ची की जान चली गई। बच्ची दिल की बीमारी से ग्रस्त थी। मृतक की मां अंबिका उसे ट्रेन से दिल्ली से रायपुर इलाज के लिए सत्य साई अस्पताल लाई थीं। जहां स्टेशन पर बच्ची की तबीयत खराब हो गई। इसी बीच उसने एम्बुलेंस को कॉल करके बुलाया और अस्पताल ले गई। अस्पताल में पहुंचने के बाद 40 मिनट तक एम्बुलेंस का दरबाजा न खुलने की वजह से उस मासूम की मौत हो गई। अंबिका ने बच्ची की मौत का जिम्मेदार एम्बुलेंस को ठहराया है। वहीं एंबुलेंस सर्विस के अधिकारियों ने दरवाजा न खुलने की घटना से इंकार किया है।

अंबिका बिहार के गया जिले की रहने वाली थी। जिसकी ढाई महीने की बच्ची दिल की बीमारी से ग्रस्थ थी। वह अपने पती के साथ मंलवार को ट्रेन से दिल्ली से रायपुर पहुंची। रायपुर पहुंचते ही अंबिका को लगा कि उसकी बच्ची की तबीयत ठीक नहीं है। ये देख उसने फ्री एम्बुलेंस सेवा संजीवनी एक्सप्रेस 108 को कॉल किया। कॉल करने के कुछ समय बाद एम्बुलेंस वहां पहुंच गई। जिसमें बैठकर वह सत्य साई अस्पताल पहुंचे। वहां पहुंचकर उन्होंने एम्बुलेंस का दरवाजा खोलने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं खुला। इस बीच एम्बुलेंस स्टाफ ने भी दरवाजा खोलने की पुरजोर कोशिश की, लेकिन दरवाजा नहीं खुला। इसकी वजह से वह अंदर फंस गए। जब 40 मिनट तक दरवाजा न खुलने के बाद एम्बुलेंस की खिड़की तोड़ने की कोशिश की लेकिन ऐसा करने से वहां मौजूद कर्मचारियों ने मना कर दिया।

जब तमाम कोशिशों के बावजूद दरवाजा नहीं खुला, तो उन्हें खिड़की से बाहर निकाला गया। इसके बाद बच्ची को अंदर ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। वहीं एम्बुलेंस सर्विस के अधिकारी इस घटना से इंकार कर रहे हैं।

राज्य में संजीवनी एक्सप्रेस सुविधा को संचालित करने वाली कंपनी जीवीके ईएमआरआई के अधिकारी सीबु कुमार का कहना है कि सुबह 10.15 बजे 108 में फोन आया कि एक बच्चे को सांस लेने में तकलीफ है। सूचना मिलते ही 10:18 बजे संजीवनी एक्सप्रेस एम्बुलेंस रेलवे स्टेशन पहुंच गई। जहां पहुंचने के बाद एम्बुलेंस में मौजूद स्टाफ ने बच्चे का वाईटल्स चेक किया लेकिन किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद बच्चे को अंबेडकर अस्पताल ले जाया गया। लेकिन अस्पताल पहुंचने पर कुछ तकनीकी समस्या के कारण एम्बुलेंस का दरवाजा नहीं खुलने पर बगैर देरी किए बच्ची और परिजन को खिड़की से निकालकर अस्पताल में भर्ती कराया गया।