गांगुली ने टीम की हार के बाद कोहली को दी सलाह

  By : Bankatesh Kumar | August 6, 2018

नई दिल्ली। भारतीय टीम के भूतपूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने कोहली को टेस्ट मैच में मिली हार के बाद सलाह दी है। साथ ही बल्लेबाज मुरली विजय और अजिंक्य राहणे को अधिक प्रतिबद्धता के साथ बल्लेबाजी करने को कहा। गांगुली ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा कि ‘अगर आपको टेस्ट मैच जीतना है तो फिर प्रत्येक को रन बनाने होंगे।’ वहीं अंतिम एकादश में बदलाव नहीं करने की सलाह दी है।

बता दें कि बर्मिंघम में 1 अगस्त से खेले गए पहले टेस्ट मैच में भारतीय टीम को इंग्लैंड से हार का सामना करना पड़ा था। इस टेस्ट मैच में भारत की टीम को 31 रन से शिकस्त मिली थी। हालांकि मैच की पहली पारी में कोहली ने 149 रन और दूसरी पारी में 51 रन बनाए थे। लेकिन अपनी टीम को हार से नहीं बचा सके। जिससे टीम को काफी आलोचनोओं का सामना भी करना पड़ा था।

इसके बाद गांगुली ने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि हार के लिए कप्तान जिम्मेदार है। अगर आप कप्तान हो तो हार के लिए आपकी आलोचना होगी जैसे कि जीत पर बधाई आपको मिलती है। उन्होंने कहा, ‘यह पांच मैचों की सीरीज का पहला टेस्ट था और मेरा मानना है कि टीम में वापसी करने और अच्छा प्रदर्शन करने की क्षमता है। अजिंक्य रहाणे और मुरली विजय को अधिक प्रतिबद्धता दिखानी होगी, क्योंकि वे पहले भी ऐसी परिस्थितियों में रन बना चुके हैं।’

उल्लेखनीय है कि इस मैच में विजय ने पहली पारी में 20 और दूसरी पारी में मात्र 6 रन ही बनाए थे। वहीं राहणे ने 15 और दो रन बनाए। इस तरह इन दोनों बल्लेबाजों ने केवल 43 रनों का योगदान दिया था। वहीं गांगुली ने कहा कि कोहली की आलोचना इसलिए भी होती रही है कि क्या उन्हें अपने बल्लेबाजों को बाहर करने से पहले पर्याप्त मौके देने चाहिए। इंग्लैंड की परिस्थितियों में स्विंग के सामने नाकामी अब बहाना नहीं हो सकता है, क्योंकि हर कोई जानता है कि इंग्लैंड में उन्हें कैसी परिस्थितियों का सामना करना होगा।’

गांगुली ने कहा, ‘यह सच है कि लगातार अंतिम एकादश से छेड़छाड़ और बदलाव करने से खिलाड़ियों के दिमाग में भय समा सकता है कि इतने वर्षों के बाद भी वे टीम प्रबंधन का भरोसा जीतने में नाकाम रहे।’ साथ ही कहा कि खिलाड़ियों को सभी प्रारूपों में खेलना महत्वपूर्ण है। इसके लिए गांगुली ने पिछली भारतीय टीमों का उदाहरण देते हुए कहा कि पूर्व की दिग्गज टीमें चाहे वह ऑस्ट्रेलिया हो, दक्षिण अफ्रीका या हमारी टीम। अच्छी बात यह थी कि खिलाड़ी दोनों प्रारूपों में खेलते थे। इनमें सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, वीरेंद्र सहवाग के अलावा मैं शामिल था।

उन्होंने कहा कि इसलिए जब आप एक या दो मैचों में असफल रहते थे, तो आपके पास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वापसी का मौका रहता था। प्रथम श्रेणी मैचों में 150 रन बनाने से आप अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की भरपाई नहीं कर सकते। इस टीम में विराट को छोड़कर कोई भी अन्य बल्लेबाज सभी प्रारूपों में नहीं खेलता है।