बिहार के इस बाहुबली के सामने घुटने टेकती थी सरकार.. ऐसे हुआ इसके खौफ का अंत

  By : Team Khabare | August 31, 2017 4:00 pm

पटना : हमेशा से ही अपराधियों और नेताओं के सांठगांठ बात की बात सामने आती रही है लेकिन आज तक कोई नेता इस पर खुलकर बोलने को तैयार नहीं हुए। नेताओं की सांठगांठ के वजह से बिहार के अपराधी बाहुबली बन गए और उनके आतंक में पूरा बिहार दहशत के साये में जीने को मजबूर हो गया। तो आइए आज हम आपको बताने जा रहे हैं बिहार के बाहुबली अपराधियों के बारे में जिनके नामों से राजधानी ही नहीं पूरा बिहार कांपता था….और ऐसे हुआ उनके अपराधिक समराज का अंत…

बिहार के सभी बाहुबली अपराधियों का यूं तो राजनीतिक इतिहास रहा है लेकिन सब से पहले नाम आता है बिहार के बाहुबली राजद के सांसद सहाबुद्दीन का जिनका पार्टी में एक अपना अलग रसूक था। बात उस वक्त की है जब बिहार में लालू का जंगलराज और राबड़ी की सरकार थी। तभी सहाबुद्दीन का आतंक पूरे बिहार में फैला हुआ था लोग उनके नाम सुनते हैं दहशत में आ जाते हैं। आम लोगों की तो छोड़िए पुलिस वाले भी इनके नामों से डरते रहते थे। यू कहे की राबड़ी देवी जब बिहार के मुख्यमंत्री थी तो शहाबुद्दीन बिहार के सुपर अपराधी सीएम हुआ करते थे।

पुलिस अधिकारियों को थप्पड़ मारने से चर्चित हुए शहाबुद्दीन के खिलाफ दर्जनों हत्या, अपहरण, रंगदारी और लूट के मामले दर्ज है।साबूत होने  के बाद भी पुलिस ने गिरफ्तार करने के लिए हिम्मत नहीं जुटा पाती थी। लेकिन जैसे ही लालू शासन का अंत हुआ सहाबुद्दीन के आतंकी समराज का उल्टा गिनती शुरू होने लगा और कुछ ही दिनों में लालू के खास कहे जाने वाले शहाबुद्दीन पुलिस के शिकंजे में कैद हो गया। जिसके खिलाफ जमीन विवाद को लेकर तीन भाइयों की तेजाब से नहलाकर हत्या का आरोप था। इसी आरोप में हाईकोर्ट ने उनकी उम्र कैद की सजा बरकरार रखी है । फिलहाल वह सीवान से निकलकर दिल्ली के तिहाड़ जेल में कैद है। और अपने गुनाहों की सजा काट रहे है।

यह तो थी बाहुबली शहाबुद्दीन की कहानी अब हम आपको बताने जा रहे हैं बिहार के दूसरे बाहुबली डॉन की कहानी जिसके नाम से पूरा राजधानी आज भी कांप जाता है लेकिन वह सलाखों के पीछे पिछले कई वर्षों से कैद है। नाम है रीत लाल यादव, इसकी भी अपराधिक छवि की उत्पत्ति 90 के दशक में हुई थी जब बिहार में बिहार में लालू सरकार चल रहा था। अपराध इसके लिए आम बात हो गई थी चलते चलते लोगों की हत्या करना और रंगदारी वसूलना तथा अपहरण मुख्य पेशा था। राजधानी पटना के कोथवां गांव के रहने वाले रीत लाल यादव कुछ ही वर्षों में अपराध की दुनिया में इतने चर्चित हो गय कि पूरा पटना उनके नाम से कांपने लगता था।

जिसके बाद उन्होंने राजधानी पटना के दानापुर के रेलवे स्टेशन में अपना पैर जमाया तथा वहां होने वाली हर टेंडर पर कब्जा कर लिया। ऐसा कहा जाता है कि जिस किसी ने भी रीत लाल यादव के रेलवे पर अवैध कब्जे को लेकर आवाज उठाई वह आज इस दुनिया में नहीं है। रीत लाल यादव उस वक्त बिहार के चर्चित डॉन बन गए जब दिनदहाड़े सत्यनारायण सिंह की निर्मम हत्या कर दी थी। जिसके बाद चलती ट्रेन में बिहार के दो रेलवे ठेकेदारों की हत्या से पुरे राजधानी मे रीत लाल यादव के नाम के आगे बाहुबली लगाए जाने लगा क्योंकि लालू प्रसाद के वह खास माने जाते थे। यह दौड़ काफी दिनों तक चला लेकिन जैसे ही बिहार में सरकार बदली उनके भी दुर्रदिन हने शुरू हो गए। फिर पुलिस ने उन्हें कई मामले में गिरफ्तार कर लिया।फिलहाल वह राजधानी पटना के बेऊर जेल मे बंद है। और हर बार चुनाव लड़ते हैं तथा उनकी जीत दर्ज होती है। रीतलाल यादव का रसूख आज भी उनके क्षेत्रों में कायम है इसी का नतीजा है कि जब लालू यादव की बेटी पटना संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ रही थी तो लालू यादव ने खुद उनके घर जाकर अपनी बेटी के लिए मदद मांगी थी।

सहाबुद्दीन और रीत लाल यादव के बाद तिसरा नाम आता है बाहुबली विधायक राजबल्लभ यादव का जो राजद से विधायक है। फिलहाल वह नाबालिग लड़की से दुष्कर्म करने के आरोप में जेल में कैद है। लालू यादव की पार्टी में राजबल्लभ यादव का एक अपना अलग पहचान था जिसे लोग बिहार के एक दबंग विधायक के रुप में जानते थे। इनके नाम के आगे बाहुबली शब्द उस वक्त से जुड़ने लगा जब यह बिहार सरकार में मंत्री हुआ करते थे और राबड़ी देवी बिहार की मुख्यमंत्री थी तभी अपने ड्राइवर का नाखून नोच कर निर्मम हत्या करने के मामले में इनका नाम सामने आया था ।लेकिन इनके रसूक के सामने उस वक्त की पुलिस घुटने टेक दिए और मामले को रफा दफा कर दिया। लेकिन जैसे ही बिहार में नीतीश कुमार की सरकार बनी और इन पर नाबालिक से दुष्कर्म करने के आरोप लगा पुलिस ने सिलेंडर करने पर मजबूर कर दिया। फिलहाल वह जेल में बंद है।

अब हम आपको बताने जा रहे हैं बिहार के वैसे अपराधी के बारे में जिसने अपराध की दुनिया में अपनी किस्मत लिखी और अपने गुनाह को छुपाने के लिए राजनीतिक नेताओं का समर्थन लिया। नाम है बिंदी यादव ,जो कभी छोटी मोटी चोरी किया करता था लेकिन धीरे-धीरे उसकी अपराधियों से साठगांठ हुई  और 90 के दशक में वह अपराध की दुनिया का बादशाह बन गया। उस वक्त बिहार में सुरेंद्र यादव, राजेंद्र यादव और महेश्वर यादव जैसे अपराधियों का बोलबाला था। लेकिन जब प्रशासन के द्वारा इन सभी लोगों पर कार्रवाई की जाने लगी तो इसने राजनीतिक नेताओं का दरवाजा खटखटाया और लालू की राष्ट्रीय जनता पार्टी जॉइन कर ली। जिसके बाद राजनीतिक संरक्षण में यह अपराधिक घटनाओं को अंजाम देने लगा। फिर वर्ष 2001 में गया जिला के जिला परिषद का निर्विरोध अध्यक्ष चुना गया और वर्ष 2010 में  विधानसभा चुनाव भी लड़ा लेकिन चुनाव नहीं जीत पाए ।उसके ऊपर कुल 18 मामले दर्ज है। जिसके बाद राजत का दामन छोड़ उसने जदयू ज्वाइन की और जेडीयू की टिकट पर बिंदी यादव की पत्नी मनोरमा देवी एमएलसी बन गई। लेकिन बेटे के एक कारनामे ने पूरे परिवार को जेल भिजवा दिया। साइड नहीं देने पर इसके बेटे रॉकी यादव ने आदित्य सचदेवा की गोली मारकर हत्या कर दी थी ।यह मामला काफी चर्चित हुआ और पार्टी से भी उसे बेदखल कर दिया गया।

अब हम आपको बताने जा रहे हैं बिहार के उस अपराधी के बारे में जिससे पूरा बिहार खौफ में जीता था नाम है आनंद मोहन ,बिहार के कोसी क्षेत्र के रहने वाले आनंद मोहन की छवि बाहुबली के रूप में चर्चित थी। राजनीति में आने से पहले इनके ऊपर कई संगीन मामले दर्ज है फिर भी वर्ष 1990 में राजनीति में एंट्री की थी और पहली बार विधायक बने थे। बिहार के दो बाहुबली आनंद मोहन और पप्पू यादव के टकराव के चर्चे पूरे देश में चर्चित रही थी। फिर 1994 में उनकी पत्नी लवली आनंद ने वैशाली लोकसभा का उप चुनाव जीती और राजनीति में अपनी धमाकेदार शुरुआत की। आनंद मोहन के अपराध की कहानी किसी से छुपी नहीं है। मामूली से विवाद में इन्होंने गोपालगंज के जिला अधिकारी की निर्मम हत्या कर दी थी और जेल चले गए थे। जेल से ही इन्होंने 1996 में लोकसभा चुनाव समता पार्टी के टिकट पर लड़ा  और जीत हासिल की तथा दो बार सांसद रहे। तो उनकी की पत्नी जो फिलहाल राजनीति में सक्रिय है वह भी एक बार सांसद रही है। फिलहाल आनंद मोहन जेल में कैद होकर उम्र कैद की सजा काट रहे हैं।

यह बात उस वक्त की है जब बिहार में पप्पू यादव, साधु यादव ,मुन्ना शुक्ला, के साथ-साथ अन्य कई राजनेता का अपराध की दुनिया में बोलबाला था लेकिन जैसे ही सरकार बनी सभी का अंत हो गया कोई जेल में कैद है तो कोई जयराम की दुनिया को हमेशा के लिए छोड़ कर जनता की सेवा में लगा हुआ है