इस टेक्नोलॉजी से कार चलाने का खर्च हो जाएगा आधा

  By : Bankatesh Kumar | August 20, 2018 7:11 pm

नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए एक नया कदम उठाया है। हाल ही में रोड ट्रांसपोर्ट एण्ड हाइवे मिनिस्ट्री द्वारा जारी अधिसूचना में मोटर व्हीकल्स एक्ट 1989 में संशोधन करने की बात कही गई थी। जिसके तहत हाइब्रिड सिस्टम को पेट्रोल और डीजल वाहनों में लगाने के बाद, कार चलाने का खर्च 50 फीसद से भी कम हो सकता है। इस अधिसूचना के तहत मौजूदा व्हीकल्स में हाइब्रिड या इलेक्ट्रिक सिस्टम के रेट्रो फिटमेंट को मंजूरी दी जाएगी। रेट्रो फिटमेंट को तीन कैटेगरीज में बांटा गया है। हालांकि, अभी इस नोटिफिकेशन को पास किया जाना बाकी है।

हाइब्रिड रेट्रो की तीन कैटेगरीज

पहली कैटेगरी में पैसेंजर व्हीकल, स्मॉल गुड्स करियर और 3500kg से कम वाले वाहनों में हाइब्रिड सिस्टम लग सकता है। वहीं दूसरी कैटेगरी में 3500 kg से ज्यादा वजन वाले वाहनों में हाइब्रिड सिस्टम लगाया जा सकता है। जबकि तीसरी कैटेगरी में मोटर व्हीकल्स को इलेक्ट्रिक ऑपरेशन्स में बदलना है। जिसमें स्टैंडर्ड इंटरनल कम्बशन इंजन को इलेक्ट्रिक इंजन से रिप्लेस किया जा सकता है।

रिप्लेस करने के काम को केवल ऑथराइज्ड वर्कशॉप्स ही कर सकते हैं। साथ ही इलेक्ट्रिक या हाइब्रिड किट मैन्युफैक्चरर्स या सप्लायर्स को सरकार की ओर से मान्यता प्राप्त टेस्टिंग एजेंसी सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य होगा।

यह सिस्टम कैसे काम करता है?

इस सिस्टम में एक इलेक्ट्रिक मोटर रहती है जिसे इंजन फैन बेल्ट से कनेक्ट करते हैं। इसी मोटर को बैटरी से भी जोड़कर उसे आसानी से चार्ज किया जा सकता है। साथ ही इलेक्ट्रिक मोटर से फ्यूल एफिशियंसी 35 फीसद तक बढ़ जाती है और एमिशन में 30 फीसद की कमी आती है। क्योंकि मोटर पेट्रोल या डीजल इंजन के क्रैंकशाफ्ट में पावर जनरेट करता है। इसे KPIT टेक्नोलॉजी ने रेवोलो नाम से बनाया है। इसके अलावा कई अन्य कंपनियां भी इलेक्ट्रिक किट प्रोवाइड कर रही हैं। इससे कार चलाने का खर्च आधे से भी कम किया जा सकता है।

इस सिस्टम को हैचबैक कारों में इंस्टॉल कराने में लगभग 80 हजार रुपये तक की कॉस्ट रहती है। जबकि बड़े डीजल एसयूवी कारों में इसकी कॉस्ट करीब 1 लाख रुपये तक होती है।