हवा से चलने वाली कार का आविष्कार

  By : Bankatesh Kumar | August 11, 2018 6:40 pm

नई दिल्ली। दुनिया में सभी देश प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग को लेकर काफी चिंतित हैं। क्योंकि ग्लोबल वार्मिंग के कारण पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ रहा है। वहीं प्रदूषण से सजीवों पर प्रत्यक्ष रूप से विपरीत प्रभाव पड़ता है। प्रदूषण की वजह से भारत सरकार देश में इलेक्ट्रानिक कारों को जल्द बाजार में उतारने की काम कर रही है। साथ ही ग्लोबल वार्मिंग को कम करने को लेकर काफी गम्भीर है। वहीं मिस्त्र में विद्यार्थियों के एक समूह ने हवा से चलने वाली कार का आविष्कार किया है। जो वायुमंडल में प्रदूषण को कन्ट्रोल करने में मददगार साबित होगी।

इस कार को हेलवान विश्वविद्यालय के एक छात्र समूह ने अपने ग्रेजुएशन के प्रोजेक्ट के तौर पर बनाया है। जो कम्प्रेस्ड ऑक्सीजन ( संपीड़ित ऑक्सीजन ) पर चलती है। छात्रों का कहना है कि यह कार एक घण्टे में 40 किलोमीटर जाएगी। छात्रों का समूह इसका विस्तार करने और इसे मर्केट में लाने के लिए धन जुटाने की कोशिश में लगा है। उनका मानना है कि कार एक घंटे में 100 किलोमीटर तक जा सकती है। इसको बनाने में ज्यादा खर्चा नहीं आएगा।

यह कार वाहनों से हो रहे प्रदूषण को कंट्रोल करने में मददगार साबित होगी। क्योंकि प्रदूषण से पर्यावरण और जीव-जन्तुओं को नुकसान पहुंचता है। जानिए प्रदूषण के बारे में।

प्रदूषणः

प्रदूषण पर्यावरण में दूषक पदार्थों के प्रवेश के कारण प्राकृतिक संतुलन में पैदा होने वाले दोष को कहते हैं। जो जीव-जन्तुओं को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे हवा, पानी, मिट्टी आदि दूषित होते हैं। जिसका सजीवों पर प्रत्यक्ष रूप से विपरीत प्रभाव पड़ता है। पृथ्वी का वातावरण स्तरीय है। पृथ्वी के नजदीक लगभग 50 km ऊँचाई पर स्ट्रेटोस्फीयर है, जिसमें ओजोन स्तर होता है। यह स्तर सूर्यप्रकाश की पराबैंगनी (UV) किरणों को शोषित कर उसे पृथ्वी तक पहुंचने से रोकता है।

आज ओजोन स्तर का तेजी से विलय हो रहा है। वातावरण में स्थित क्लोरोफ्लोरो कार्बन (CFC) गैस के कारण भी ओजोन स्तर का विलय हो रहा है। इसे सबसे पहले 1980 में नोट किया गया था। ओजोन स्तर का विलय पूरी पृथ्वी के चारों ओर हो रहा है। दक्षिण ध्रुव विस्तारों में ओजोन स्तर का विलय 40%-50% हुआ है। ओजोन स्तर के घटने के कारण ध्रुवीय प्रदेशों पर जमा बर्फ पिघलने लगी है।

साथ ही मनुष्यों को इससे अनेक प्रकार के चर्म रोगों का भी सामना करना पड़ रहा है। ये रेफ्रिजरेटर और एयरकंडिशनर में से उपयोग में होने वाले फ़्रियोन और क्लोरोफ्लोरो कार्बन (CFC) गैस के कारण समस्या उत्पन्न हो रही है। वहीं वाहनों तथा फैक्ट्रियों से निकलने वाले गैसों के कारण हवा (वायु) प्रदूषित होती है।

इसके अलावा ग्लोबल वार्मिंग के कारण पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ रहा है। जिससे प्राकृतिक आपदाए, समुद्र के स्तर में वृद्धि, मौसम में परिवर्तन, ग्लेशियरों के पिघलने, जंगलों की कमी, कई प्रकार के जीवों और वनस्पति प्रजातियां का विनाश, विभिन्न रोगों में वृद्धि आदि दुनिया में देखे जा रहे हैं।