समलैंगिकता अपराध नहीं, उन्हें सम्मान से जीने का अधिकार: SC

  By : Akash Kumar | September 6, 2018 11:32 am

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के सीजेआई दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ ने गुरुवार को समलैंगिकता पर एतिहासिक फैसला सुनाया है। पीठ ने कहा कि समलैंगिकता अपराध नहीं है। समलैंगिकों को भी सम्मान से जीने का हक है। आईपीसी की धारा 377 की संवैधानिक वैधता को चुनौती वाली याचिकायों पर आज कोर्ट ने फैसला सुना दिया है। इसी साल जुलाई महीने में 377 पर सुनवाई शुरु हुई थी। पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि अगर कोई कानून मौलिक अधिकारों का हनन करता है, तो कोर्ट सरकार के फैसले का इंतजार नहीं करेगी, की वह इसे रद्द करें।

समलैंगिकता अपराध है या नहीं, इस बारे में पिछली 17 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी। यह सुनवाई प्रमुख न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष चार दिनों तक चली। सुनवाई के बाद सभी पक्षकारों को अपने-अपने समर्थन में 20 जुलाई तक लिखित दलीलें देने के लिए कहा गया था। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने कहा है कि समलैंगिकों  को भी सम्मान से जीने का हक है,उन्हें वह सभी मौलिक अधिकार मिलते है जो आम लोगों के लिए है।  सुबह से ही सुप्रीम कोर्ट के बाहर समलैगिको का हूजुम जमा है। फैसले आने के बाद समर्थकों के बीच खुशी की लहर दौड़ गई है।

इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने 2 जुलाई 2009 को समलैंगिकता को धारा 377 से बाहर कर दिया था। मतलब दो बालिगों में सहमति से अप्राकृतिक संबंध को अपराध नहीं माना था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की बेंच ने 11 दिसंबर 2013 को हाईकोर्ट के फैसले को गलत ठहराते हुए इसे अपराध ठहराया था। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव  पेटिशन दायर की गई थी। जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस याचिका को पांच जज सुनकर फैसला सुनाएंगे।