आयोध्या विवाद पर पेपर कंप्लीट, आज होगी सुनवाई

  By : Rahish Khan | March 13, 2018 7:28 pm
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नई दिल्ली। अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार 14 मार्च से सुनवाई शुरु हो रही है। इस मामले में कागजी कार्रवाई और अनुवाद का काम पूरा हो गया है। आशंका जताई जा रही है कि अब इस मामले में जल्द ही कोई फैसला आ जाएगा। 8 मार्च को सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार के सामने हुई मीटिंग में सभी पक्षों ने कहा कि कागजी कार्रवाई और अनुवाद का काम लगभग पूरा कर लिया गया है।

कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट तय करेगा की इस मामले की सुनवाई की आगे की रुपरेख क्या होगी। इससे पहले इस मामले में 8 फरवरी को सुनावाई हुई थी। इस दौरान चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नजीर की पीठ में सभी पक्षों ने दस्तावेजों के जरिए अपना पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपक मिश्रा ने साफ किया था कि वह इस मामले को जमीन विवाद के तौर पर देखेंगे। कोर्ट ने सभी पक्षों को दस्तावेज तैयार करने का आदेश दिया था। साथ ही, कोर्ट ने साफ किया कि इस मामले में अब कोई नया पक्षकार नहीं जुड़ेगा।

बता दें कि हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सबसे पहले सुन्नी वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लिहाज़ा पहले बहस करने का मौका सुन्नी वक्फ बोर्ड को मिल सकता है। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने काग़जी कार्रवाई और अनुवाद का काम पूरा करने के आदेश दिए थे।

दस्तावेजों का किया गया अनुवाद

इस मामले से जुड़ी 9,000 पन्नों के दस्तावेज और 90,000 पन्नों में दर्ज गवाहियां पाली, फारसी, संस्कृत, अरबी सहित विभिन्न भाषाओं में हैं, जिस पर सुन्नी वक्फ बोर्ड ने कोर्ट से इन दस्तावेजों को अनुवाद कराने की मांग की थी। अब इस मामले में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई में तीन जजों की बेंच सुनवाई करेगी।

क्या था पूरा मामला?

आयोध्या में एक आदोंलन के तहत 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद को गिरा दिया गया था। इस मामले में आपराधिक केस के साथ-साथ कई दिग्गजों पर साजिश के मामले दर्ज हुए। टाइटल विवाद से संबंधित मामला सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 30 सितंबर 2010 को अयोध्या टाइटल विवाद में फैसला दिया था। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में इस विवादित जमीन को तीन बराबर हिस्सों बांट दिया था। जिस जगह रामलला की मूर्ति है, उसे रामलला विराजमान को दिया गया। सीता रसोई और राम चबूतरा निर्मोही अखाड़े को दिया गया, जबकि बाकी की एक तिहाई जमीन सुन्नी वक्फ बोर्ड को दी गई।

इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने आया। अयोध्या की विवादित जमीन पर रामलला विराजमान और हिंदू महासभा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। वहीं, दूसरी तरफ सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने भी सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अर्जी दाखिल कर दी। इसके बाद इस मामले में कई और पक्षकारों ने याचिकाएं लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने 9 मई 2011 को इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए सुनवाई करने की बात कही। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है।