धारा 377 पर अपने विवेक से फैसला ले सुप्रीम कोर्ट: केंद्र

  By : Rahish Khan | July 11, 2018 1:15 pm
supreme court, homosexuality, hearing ipc section 377, criminalizes, modi govt, chief justice dipak misra

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संवैधानिक पीठ समलैंगिगता को अपराध के तहत लाने वाली धारा 377 पर सुनवाई कर रही है। केंद्र सरकार की ओर से बुधवार को इस मामले में हलफनामा पेश किया है। केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अपनी बात रखते हुए कहा कि धारा 377 पर सुप्रीम कोर्ट अपने विवेक से फैसला ले। इससे पहले कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार से अपना पक्ष रखने को कहा था।

सरकार ने कहा कि कि सर्वोच्च न्यायालय बच्चों के खिलाफ हिंसा और शोषण को रोकना सुनिश्चित करे। इससे पहले मंगलवार को कोर्ट में समलैंगिकता को अपराधमुक्त करने की मांग कर रहे याचिकाकर्ताओं के वकीलों के तर्क सुने गए थे। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए अरविंद दातार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि 1860 का समलैंगिकता का कोड भारत पर थोपा गया था। यह तत्कालीन ब्रिटिश संसद का इच्छा का प्रतिनिधित्व भी नहीं करता था।

उन्होंने कहा, ‘अगर यह कानून आज लागू किया जाता तो यह संवैधानिक तौर पर सही नहीं होता।’ इस पर सर्वोच्च अदालत ने कहा कि ‘आप हमें भरोसा दिलाइए कि अगर आज की तारीख में कोई ऐसा कानून बनाया जाता है तो यह स्थायी नहीं होगा।’ दातार ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति का यौन रुझान अलग है तो इसे अपराध कैसे कहा जा सकता। समलैंगिकता कोई बीमारी नहीं है। इसे प्रकृति के खिलाफ नहीं कहा जा सकता।

वहीं, केंद्र सरकार से ओर से कोर्ट में पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह मामला धारा 377 तक ही सीमित रहना चाहिए। इसका उत्तराधिकार, शादी और संभोग के मामलों पर कोई असर नहीं पड़ना चाहिए। इस पर चीफ जस्टिस ने टिप्पणी की कि यह मामला केवल धारा 377 की वैधता से जुड़ा है इसका असर नागरिकों के अन्य अधिकारों पर नहीं पड़ेगा।

चीफ जस्टिस की अगुवाई में सुनवाई

बता दें कि इस मामले में मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के साथ जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस एएम खानविलकर, डीवाई चंद्रचूड़ और इंदु मल्होत्रा की बेंच सुनवाई कर रही है। इससे पहले सोमवार को सर्वोच्च अदालत ने केंद्र की चार हफ्ते के लिए सुनवाई टालने के आग्रह को ठुकरा दिया था। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि सुनवाई टाली नहीं जाएगी।