पढ़ें: ICJ दलवीर भंडारी ने फिर लहराया परचम

By Team Khabare Nov 21, 2017 12:13 pm

नई ​दिल्ली। पद्मभूषण से सम्मानित जस्टिस दलवीर भंडारी 40 साल से भी ज्यादा समय तक भारतीय न्याय प्रणाली का हिस्सा रहे हैं। कभी वकील के रूप में, कभी हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट के जज तो कभी अंतर्राष्ट्रीय अदालत के जज के रूप में देश का नाम ऊंचा किया है। जस्टिस दलवीर भंडारी राजस्थान के जोधपुर जिले के रहने वाले हैं। जस्टिस भंडारी ने 1973 से 1976 तक राजस्थान हाईकोर्ट में वकालत की और उसके बाद दिल्ली आ गए। जब तक दिल्ली उच्च न्यायलय के जज नहीं बन गए तब तक उन्होंने प्रैक्टिस जारी रखी। दिल्ली हाईकोर्ट का जज बनने के बाद जस्टिस दलवीर भंडारी बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश चुने गए। उसके बाद जस्टिस भंडारी 2005 में सुप्रीम कोर्ट के जज बने। 2012 में सुप्रीम कोर्ट से रिटायर होने के बाद वे अपनी काबिलियत के दम पर अंतर्राष्ट्रीय अदालत के जज बने। वर्ष 2012 में भारतीय उम्मीदवार के रूप में जस्टिस दलवीर भंडारी को अंतरराष्ट्रीय अदालत में जज के पद के लिए भारी मतों से चुना गया। नवम्बर 2017 में वे इस पद पर दूसरे कार्यकाल के लिए फिर से चुने गए हैं।

नीदरलैंड के हेग स्थ‍ित अंतरराष्ट्रीय अदालत में भारतीय जज दलवीर भंडारी दोबारा से जज चुने गए हैं। बता दें कि जस्टिस दलवीर भंडारी को जनरल एसेंबली में 183 मत हासिल किए हैं। उनका मुकाबला ब्रिटेन के उम्मीदवार जस्टिस क्रिस्टोफर ग्रीनवुड चल रहा था। जस्टिस भंडारी के सामने ग्रीनवुड नहीं टिक पाए और ग्रीनवुड ने अपनी दावेदारी वापस ले ली।

जस्टिस दलवीर भंडारी जनरल एसेंबली में 11वें मुकाबले तक आगे रहे। लेकिन सिक्योरिटी काउंसिल में उनके पास मत कम थे। वहीं 12वें दौर में ब्रिटेन के उम्मीदवार ग्रीनवुड मैदान से हट गए। बता दें कि अंतर्राष्ट्रीय अदालत में जज बनने के लिए सिक्योरिटी काउंसिल और जनरल एसेंबली दोनों में जीत दर्ज करना बेहद जरूरी होता है।

बता दें कि अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट में कुल 15 जजों का चयन किया जाता है। 15 जजों में से 15 जजों का चयन हो चुका था। 15वें जज के लिए ब्रिटेन और भारत में मुकाबला हुआ। इस मुकाबले में भारत ने बाजी मारी। और जस्टिस भंडारी दोबारा को दोबारा अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट का जज चुना गया। आईसीजे भंडारी ने ही कुलभूषण जाधव मामले में अहम भूमिका निभाई थी।

जस्टिस दलवीर भंडारी ने ही ‘ज्यूडिशियल रिफॉर्म्स: रीसेंट ग्लोबल ट्रेंड्स’ नाम की पुस्तक लिखी। जिन्होंने इस पुस्तक को पढ़ा उन्होंने इस पुस्तक की काफी प्रशंसा की। जस्टिस भंडारी ने कई फैसले किए हैं जिसके चलते सरकार को कई नीतियां भी बनानी पड़ी। गरीबों के लिए रैन बसैरे बनाने का अहम फैसला भी जस्टिस भंडारी का ही था। साथ ही उनके ऐतिहासिक फैसलों में हिंदू विवाह कानून 1955, बच्चों को अनिवार्य और निशुल्क शिक्षा का अधिकार सहित कई प्रमुख फैसलें हैं और सरकार ने इन निर्देशों को जल्द से जल्द लागू किया। 

रिलेटेड पोस्ट