चाय पर पटाखे की चर्चा: ‘गुस्से में दिल्ली वाले, कुछ इस तरह देंगे जवाब’

  By : Abhishek Tiwari | October 12, 2017 2:47 pm
Firecrackers Ban In Delhi On Diwali

अभिषेक तिवारी, नई दिल्ली।

क्या लाला जी पटाखा ओटाखा नहीं फोड़ेंगे क्या! लाला बोले, सुप्रीम कोर्ट के फैसले को छोड़िए साहब, इस बार लोग गुस्साए हैं, ज्यादा पटाखा फोड़कर जवाब देंगे। इस बार पटाखा दुकान पर जाकर खरीदने की जरूरत नहीं है। ऑनलाइनें ऑर्डर करिए और पठाखा सीधे आपके घर। दुकान पर जाने का झमेला सुप्रीम कोर्ट ने खत्म कर दिया है। वहां चाय की चुस्की ले रहे भाई ऑटो चालक दिनेश ने कहा कि का बताई भईया, अब तो कोर्ट भी हमनिए के पीछे बा। ये बातें हो रही थी उत्तरी दिल्ली के कन्हैया नगर स्थित लाला जी के चाय के दुकान पर।

बातचीत धीरे-धीरे अपने रंग में आ रही थी। कई तरह की बातें शुरू हो गई। किसी ने कहा, कोर्ट को सिर्फ दिवाली ही दिखा क्या? ऐसा लग रहा है जैसे प्रदूषण सिर्फ दिवाली के पटाखे से ही फैलता है। इस देश में और कोई दिन नहीं जब लोग पटाखे जलाते हो या किसी अन्य चीज से प्रदूषण फैलता हो।

दिनेश भाई ताव में आ गए। चाय के गिलास को जोर से फेंका और बोल पड़े, नेता सब को रोकिए न। बियाह शादी बंद करा दीजिए। उनकी दलील थी कि हर चुनाव में जीत के बाद पटाखों की छड़ी लगा दी जाती है। उससे तो कोर्ट-कचहरी को दिक्कत नहीं है। क्योंकि उसमें नेता लोगों की बात है। केवल आमलोगों से ही सबको समस्या है इस देश में। दिनेश भाई गुस्सा को कंट्रोल करते हुए ऑटो की तरफ बढ़े और बोले देख लीजिएगा कुछ दिन बाद बियाह शादी पर भी पाबंदी लग जाएगी। क्योंकि लोग पटाखा फोड़ते हैं और नाचते गाते हैं उससे भी तो प्रदूषण होता होगा। भगवाने मालिक हैं इस देश का।

इस तरह की बातें सिर्फ एक चाय दुकान या दिल्ली के किसी एक इलाके तक सीमित नहीं है, लगभग हर जगह लोग इस तरह की चर्चा कर रहे हैं। राजीव चौक मेट्रो स्टेशन पर चढ़े कॉलेज जाने वाले छात्रों की बात सुनकर यह लगा कि शायद लोगों की भावनाएं सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भारी न पड़ जाए।

छात्रों की आपस में बातचीत कुछ ऐसी थी कि हम लोग स्टूडेंट हैं। घर से पैसे आते हैं। हम दिवाली पर दो-चार सौ रुपए के पटाखे जलाते हैं लेकिन इस बार हम आपस में कॉन्ट्रिब्यूट कर दो-तीन हजार के पटाखे जलाएंगे। अब ऐसा थोड़ी न होगा कि सुप्रीम कोर्ट ये डिसाइड करने लगे कि हमें दिवाली, होली मनानी है या नहीं। प्रदूषण और पर्यावरण की हमें भी चिंता है लेकिन प्रदूषण फैलाने के लिए सिर्फ दिवाली पर चोट ना करिए। चल बे उतर रहा मैं, मेरा स्टेशन आ गया।