पुरूषों के लिए भी 18 साल हो शादी की उम्र: विधि आयोग

  By : Bhagya Sri Singh | September 1, 2018 1:53 pm
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नई दिल्ली। विधि आयोग ने ‘परिवार कानून’ में सुधार पर अपने परामर्श पत्र में पुरुषों के लिए शादी की वैध उम्र कम करने का सुझाव दिया है। विधि आयोग ने कहा कि महिलाओं और पुरुषों के लिए शादी की न्यूनतम उम्र एकसमान होनी चाहिए। वयस्कों के विवाह के लिए अलग-अलग उम्र की व्यवस्था को समाप्त कर देना चाहिए। देश को भले ही सामान नागरिक संहिता के लिए प्रतीक्षा करनी पड़े, लेकिन इस कानून में जल्द ही सुधार की आवश्यकता है।

बता दें कि, भारतीय बालिग अधिनियम 1875 के तहत, पुरुषों के लिए शादी की वैध उम्र 21 साल है तो वहीं महिलाओं के लिए महज 18 साल है। विधि आयोग ने सुझाव देते हुए कहा कि यदि बालिग़ होने की सार्वभौमिक उम्र को मान्यता प्राप्त है, जिसके तहत नागरिकों को मतदान कर सरकार चुनने का अधिकार प्राप्त है। तो उन्हें अपना जीवनसाथी चुनने में भी समर्थ समझा जाना चाहिए।

विधि आयोग ने कहा कि महिलाओं और पुरुष दोनों के लिए बालिग होने की उम्र (18 साल) को शादी की कानूनी उम्र के रूप में मान्यता मिलनी चाहिए। पति और पत्नी के लिए उम्र में अंतर का कोई कानूनी आधार नहीं है, क्योंकि शादी कर रहे दोनों लोग हर तरह से बराबर हैं और उनकी साझेदारी बराबर वालों के बीच वाली होनी चाहिए।

विधि आयोग ने अपना मत पेश करते हुए पत्र में लिखा कि महिलाओं और पुरुषों की शादी की उम्र में अंतर रखना उस रूढ़िवादी विचारधारा को हवा देता है जिसके अनुसार पत्नी की उम्र अपने पति से कम होनी चाहिए। आयोग ने यह भी कहा कि फिलहाल देश में सामान नागरिक संहिता की आवश्यकता नहीं है।