देश के इतिहास पहली बार जजों की PC, न्यायपालिका में सबकुछ ठीक नहीं

  By : Rahish Khan | January 12, 2018 12:23 pm
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नई दिल्ली। भारत के न्यायपालिका के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने शुक्रवार को मीडिया को संबोधित किया। प्रेस कांफ्रेंस में जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा कि कभी-कभी होता है कि देश के सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था भी बदलती है। सुप्रीम कोर्ट का प्रशासन ठीक तरीके से काम नहीं कर रहा है, अगर ऐसा चलता रहा तो लोकतांत्रिक परिस्थिति ठीक नहीं रहेगी। उन्होंने कहा कि हमने प्रशासनिक अव्यवस्था तथा कॉलेजियम में व्याप्त भ्रष्टाचार पर चीफ जस्टिस से बात की, लेकिन उन्होंने हमारी बात नहीं सुनी।

मीडिया से बात करते हुए जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा कि अगर हमने देश के सामने ये बातें नहीं रखी और हम नहीं बोले तो देश का लोकतंत्र खत्म हो जाएगा। उन्होंने कहा, ‘करीब दो महीने पहले हम 4 जजों ने चीफ जस्टिस को पत्र लिखा था और मुलाकात की। हमने उनसे बताया कि जो कुछ भी हो रहा है, वह सही नहीं है। प्रशासन ठीक से नहीं चल रहा है। यह मामला एक केस के असाइनमेंट को लेकर था।’

देश करे चीफ जस्टिस पर फैसला

जस्टिस चलमेश्वर ने कहा कि चीफ जस्टिस पर देश को फैसला करना चाहिए, हम बस देश का कर्ज अदा कर रहे हैं। जजों ने कहा कि हम नहीं चाहते कि हम पर कोई आरोप लगाए। उन्होंने अपने शिकायत पत्र में दो मुद्दे उठाए। जिसमें पहला रोटेशन यानी कौनसा मुकदमा किस जज के पास जाना है।  वहीं दूसरा सवाल संवाद हीनता किसी भी समस्या को लेकर दूसरे जजों से सलाह न करना।

पहली बार जजों ने की प्रेस कॉन्फ्रेंस

बता दें कि देश के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की हो। इससे पहले आमतौर पर जज मीडिया से दूरी बनाकर रखते हैं और सार्वजनिक तौर पर न्यायपालिका का पक्ष चीफ जस्टिस ही रखते रहे हैं।  प्रेस कॉन्फ्रेंस में जस्टिस जस्ती चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ शामिल हुए। जस्टिस चलमेश्वर सुप्रीम कोर्ट के दूसरे सबसे सीनियर जज हैं।