दिल्ली कैबिनेट पुराने रूके हुए प्रोजेक्टों को देगी मंजूरी!

  By : Bhagya Sri Singh | July 4, 2018 2:37 pm
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नई दिल्ली। लंबे समय से दिल्ली की सत्ता को लेकर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल व उपराज्यपाल अनिल बैजल के बीच चली जंग पर विराम लग गया है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केजरीवाल और उपराज्यपाल के अधिकारों पर फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि उपराज्यपाल अनिल बैजल को दिल्ली सरकार के कैबिनेट की सलाह के आधार पर ही फैसला करना होगा। उपराज्यपाल को स्वतंत्र अधिकार नहीं दिए गए हैं। उन्हें हर निर्णय की कॉपी सरकार को देनी होगी। दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं दिया जा सकता है। अदालत ने कहा कि लोकतंत्र में अराजकता के लिए कोई भी स्थान नहीं है।अदालत के इस फैसले के बाद दिल्ली कैबिनेट में लंबे समय से ठप पड़ा कामकाज एक बार फिर से सुचारू रूप से चल सकेगा। दिल्ली कैबिनेट की बैठक में सरकार के रुके हुए कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर चर्चा होगी।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपराज्यपाल अनिल बैजल के बीच तकरार की वजह से कुछ प्रोजेक्ट्स पर ग्रहण लगा हुआ था। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कैबिनेट बैठक में इन अहम प्रोजेक्ट्स पर चर्चा हो सकती है।

– पिछले कुछ समय से शिक्षा विभाग की 18 परियोजनाएं ठप हैं। अब इनपर चर्चा हो सकती है।

– स्वास्थ्य विभाग की 4 योजनाएं जोकि अभी शुरू ही नहीं हो पाई, अब उनपर दुबारा विचार विमर्श हो सकता है।

– ट्रांसपोर्ट और पीडब्यल्यूडी की 10 परियोजनाएं केवल कागजों पर ही हैं, साथ ही पानी से जुड़े चार प्रोजेक्ट्स रुके हुए हैं। इस पर भी कैबिनेट में चर्चा हो सकती है।

– रूरल एरिया डेवलपमेंट के लिए 600 करोड़ में से केवल 46 करोड़ के टेंडर हुए। बजट में घोषित यमुना रिवर फ्रंट पर भी विचार विमर्श हो सकता है।

– मिड-डे मील के 55 करोड़ और सेनेटरी नेपकिन के 16 करोड़ का फंड भी लैप्स होने पर भी कैबिनेट में चर्चा हो सकती है।

– दिल्ली सरकार ने 24 नये स्कूल खोलने का वादा किया था, लेकिन अभी ये प्रोजेक्ट भी रुका हुआ है। इन प्रोजेक्ट्स पर भी चर्चा हो सकती है।

-दिल्ली सरकार ने अपने पिछले बजट में 156 प्री-प्राइमरी क्लासेज शुरू करने की बात की थी लेकिन अभी तक इस प्रोजेक्ट के भी काम अधर में हैं। कैबिनेट मीटिंग में इस प्रोजेक्ट पर भी चर्चा हो सकती है।

– केजरीवाल सरकार ने दिल्ली में 1 हजार मोहल्ला क्लीनिक के निर्माण का वादा किया था लेकिन अब तक 105 मोहल्ला क्लीनिक का ही निर्माण किया जा सका है।

– दिल्ली सरकार ने 150 पॉली क्लीनिक के निर्माण का वादा किया था। लेकिन अभी तक सिर्फ 16 पॉली क्लीनिक का ही निर्माण हो पाया है। कैबिनेट बैठक में शेष क्लीनिकों के निर्माण पर भी चर्चा हो सकती है।

-अस्पतालों के बिस्तरों की क्षमता 10 हजार से बढ़ाकर 20 हजार करने का वादा किया गया था, लेकिन इस प्रोजेक्ट पर अभी काम शुरू नहीं हो पाया है। कैबिनेट मीटिंग में अस्पतालों में बेड की संख्या बढ़ाने को लेकर भी बातचीत हो सकती है।

– दिल्ली के हर नागरिक को ‘हेल्थ कार्ड’ देने की योजना पर भी बैठक में विचार हो सकता है।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रसन्नता प्रकट करते हुए कहा कि राजधानी दिल्ली में लोकतंत्र की जीत हुई है। गौरतलब हो कि आम आदमी पार्टी पहले कई बार केंद्र सरकार पर यह आरोप लगा चुकी है कि वह उपराज्यपाल के जरिए दिल्ली के कामकाज में बाधा डालने का प्रयास कर रही है।

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि उपराज्यपाल को दिल्ली सरकार के साथ मिलकर काम करना चाहिए। दिल्ली की स्थिति बाकी केंद्र शासित राज्यों और पूर्ण राज्यों से अलग है, इसलिए सभी साथ काम करें। पुलिस, जमीन और पब्लिक ऑर्डर के अलावा दिल्ली विधानसभा कोई भी कानून बना सकती है। संविधान का पालन करना हर किसी का कर्तव्य है। केंद्र और राज्य के बीच भी सौहार्दपूर्ण सम्बन्ध होने चाहिए। राज्यों को राज्य और समवर्ती सूची के तहत संवैधानिक अधिकार का प्रयोग करने का अधिकार है।