समलैंगिकता को मंजूरी, जानिए धारा 377 और सजा के प्रावधान

  By : Akash Kumar | September 6, 2018 2:04 pm

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को धारा 377 की वैधता पर फैसला ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अब समलैंगिक संबंध अपराध की श्रेणी में नहीं आएगा। फैसला सुनाते हुए पांच जजों की पीठ ने कहा कि समलैंगिकों को भी सम्मान से जीने का अधिकार है। कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले के बाद समलैंगिकों के खुशी का ठिकाना नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के बाहर जश्न का माहौल है। आपसी सहमति से समलैंगिक यौन संबंध को अपराध की श्रेणी में रखने वाली आईपीसी की धारा 377 की वैधता पर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। आज हम आपको धारा 377 और इसमें सजा के प्रावधान के बारे में बताते हैं।

बता दें कि दोनों की रजामंदी से बनाया गया यौन संबंध अब अपराध नहीं है। हाईकोर्ट में आईपीसी की धारा 377 को अवैध करार देने के बाद सुप्रीम कोर्ट में मामला विचाराधीन था। इससे संबंधित याचिकाओं पर चार दिन की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने आज फैसला सुनाया है। अब भारत में बालिग समलैंगिक संबंध अपराध नहीं होगा।

क्या है आईपीसी की धारा 377

धारा 377 में अप्राकृतिक यौन संबंधों को अपराध माना जाता है। इस धारा के मुताबिक जो कोई भी प्रकृति की व्यवस्था के विपरीत किसी पुरुष, महिला या पशु के साथ यौन संबंध बनाता है, उसे उम्रकैद या दस साल तक की कैद की सजा दी जा सकती है। साथ ही जुर्माने की सजा का भी प्रावधान है।

समलैंकिगता पर कानून 

अप्राकृतिक यौन संबंध का पहला मामला साल 1290 में इंग्लैंड के फ्लेटा इलाके से सामने आया था। जिसके बाद समलैंगिकता पर कानूनी कार्रवाई करके उसे अपराध घोषित कर दिया गया। इसके बाद ब्रिटेन और इंग्लैंड में 1533 में अप्राकृतिक संबंधों को लेकर बगरी एक्ट बनाया गया। इस एक्ट के तहत समलैंगिकों के लिए फांसी का प्रावधान था। सन् 1817 में बगरी एक्ट से ओरल सेक्स को हटा दिया गया।

भारत में धारा 377

ब्रिटीश सरकार लॉर्ड मेकाले ने सन् 1860 में भारतीय दंड संहिता में धारा 377 को शामिल किया और भारत में लागू कर दिया। सन् 1861 में समलैंगिकता अपराध में से मौत की सजा का प्रावधान हटा दिया गया।

LGBTQ समुदाय ने भी की धारा 377 हटाने की मांग

इस समुदाय के अन्दर लेस्बियन, गे, बाइसेक्सुअल, ट्रांसजेंटर और क्वीयर आते हैं। इस समुदाय की मांग है कि धारा 377 को अवैध ठहराया जाए। निजता के अधिकार पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इस समुदाय ने अपनी मांगों को फिर से तेज कर दिया था। इस संबंध में कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में लंबित थीं।

इन देशों में समलैंगिकता अपराध नहीं

विश्व में कई ऐसे देश हैं, जहां समलैंगिकता पूरी तरह से कानूनी है। ऑस्ट्रेलिया, माल्टा, जर्मनी, फिनलैंड, कोलंबिया, आयरलैंड, अमेरिका, ग्रीनलैंड, स्कॉटलैंड, लक्जमबर्ग, इंग्लैंड, वेल्स, ब्राजील, फ्रांस, न्यूजीलैंड, उरुग्वे, डेनमार्क, अर्जेंटीना, पुर्तगाल, आइसलैंड, स्वीडन, नॉर्वे, दक्षिण अफ्रीका, स्पेन, कनाडा, बेल्जियम और नीदरलैंड हैं। यहां इस तरह के यौन संबंध मान्य हैं।