लव-बर्ड्स इसलिए हो जाते हैं साथी से दूर

  By : Bhagya Sri Singh | August 11, 2018 3:03 pm
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नई दिल्ली। समय इस संसार की सबसे अमूल्य दौलत है जो हम किसी को दे सकते हैं। अपने प्रियजनों के साथ क्वालिटी टाइम स्पेंड कर के ही आप उनका विश्वास व प्रेम पा सकते हैं। साथ अच्छा समय बिताने से दांपत्य सम्बन्ध मधुर रहते हैं। दांपत्य जीवन में एक दूसरे की परवाह करना और जीवन में हर धूप-छांव में अपने साथी के साथ खड़े रहने से ही संबंधों में मजबूती आती है। लेकिन कभी कभी रिश्तों पर ध्यान न देने के कारण उनकी डोर कमजोर पड़ती जाती है। शादी के एक या दो साल के बाद लोग जब अपनी मूल दिनचर्या में वापस लौटते हैं तो फिर शुरू होता है लव बर्ड्स में खिंचाव का सिलसिला। लड़के जहां अपने मन की बात कहकर प्रकट करते हैं तो वहीं लड़कियां मन ही मन किसी दर्द को बर्दाश्त करती हैं।

लव बर्ड्स के बीच एक स्थिति ऐसी भी आती है जब लगभग हर दो दिन छोड़कर दोनों में लड़ाईयां होती हैं और मनमुटाव तो हमेशा बना ही रहता है। इस स्थिति से बचने के लिए कपल्स ज़्यादातर समय घर से बाहर बिताने लगते हैं ताकि घर आकर उन्हें साथी के ताने न झेलने पड़ें। शुरू शुरू में कपल्स के बीच हो रहे टकराव की आवाज घर की चहारदीवारी में ही कैद रह जाती है लेकिन जैसे जैसे समय बढ़ता जाता है वैसे-वैसे पड़ोसियों और जानकारों को भी दंपत्ति के बिगड़ते संबंधों की जानकारी लग जाती है। यह स्थितियां न केवल आपके लिए बल्कि आपके रिश्ते के लिए भी बेहद खतरनाक हैं। आइये आज हम आपको बताते हैं कि क्यों लोग अपने साथी से दूर हो जाना चाहते हैं:

– कुछ लोग सामजिक रूप से बहुत ज्यादा सक्रिय होते हैं। ऐसे लोग अपने दोस्तों, जानकारों के साथ हलके फुल्के और मस्ती भरे मोमेंट्स को एन्जॉय करते हैं। घर आकर ऐसे लोग इतना थक जाते हैं कि अपने साथी के साथ वक्त नहीं गुजार पाते और साथी को लगता है कि उनका पार्टनर उन्हें नजरंदाज कर रहा है।

– जब आप अपने साथी से किसी बात को लेकर बात करना बंद कर देते हैं तो आपके बीच में भावनात्मक जुड़ाव धीरे धीरे खत्म होता जाता है। पति-पत्नी एक दूसरे से अपनी भावनाएं साझा करने से कतराने लगते है। इस अप्रिय स्थिति से बचने के लिए पार्टनर से कनेक्टिविटी बनी रहनी चाहिए।

– पार्टनर को समय और अटेंशन दोनों दे। इससे आपके बीच की दूरियां ख़त्म होंगी। किसी भी बात को लेकर यदि साथी आपसे बहस कर रहा है तो आप ही चुप होकर समझदारी का परिचय दें। बातचीत रिश्तों को संभालने के लिए होनी चाहिए बिखेरने के लिए नहीं।