शायराना अंदाज में यूं बयां करें हाल-ए-दिल, हां कह देगा पार्टनर

By Bhagya Sri Singh Feb 8, 2018 5:02 pm

नई दिल्ली। वैलेंटाइन्स वीक की कल से ही शुरुआत हो चुकी है। आज इसका दूसरा दिन है। ये दिन इसलिए भी बेहद ख़ास क्योंकि साल भर सोच-विचार के बाद भी जो प्रेमी जोड़े अभी तक पार्टनर से अपना हाल-ए-दिल नहीं बयां कर पाए हैं वो भी आज हिम्मत कर के पार्टनर से मन की बात कह ही डालेंगे। प्यार का ये पर्व प्रेमियों को न केवल उमंग से भर देता है बल्कि उन्हें उत्साह से लबरेज भी बनता है। 

फरवरी को वैसे भी प्यार का महीना कहा जाता है। जब सर्द हवाएं आपकी महबूबा के रुखसार को हौले से छू कर गुजर जाती हैं तो बेशक आपको उनसे रश्क होता होगा। आखिर हो भी क्यों न एक आप हैं जो जनाब अब तक अपने दिल का हाल अपनी हमदम से बयां नहीं कर पाए हैं और एक ये बेशर्म हवा। तो जनाब ऐसे में हवा से रश्क करने की जरूरत नहीं है। आप जैसे लोगों के लिए ही प्रपोज डे बना है।

वैसे बदलते ट्रेंड के साथ जहां इस मामले में लड़के थोड़े दब्बू और बाबू टाइप होते जा रहे हैं तो वहीं लड़कियां पहले से कहीं ज्यादा बोल्ड और बेबाक हुई हैं वो खुल कर अपने प्यार का इजहार करती हैं और अपनी भावनाओं को स्वीकारने में शर्माती नहीं हैं।


आइए आज हम आपको बताते हैं कुछ मशहूर शायरों द्वारा लिखी गई ऐसी चंद शायरियां जिसे सुनकर आपकी महबूबा आपके प्यार की गहराई को जरूर समझेगी और आपको हां कर देगी।

गुलजार साहब

तुम्हारे हाथों को चूम कर,
छूके अपनी आँखों से आज मैंने.
जो आयतें पढ़ नहीं सका,
उनके लम्स महसूस कर लिए हैं।

केदारनाथ सिंह

उसका हाथ
अपने हाथ में लेते हुए मैंने सोचा
दुनिया को
हाथ की तरह गर्म और सुंदर होना चाहिए।

जगजीत सिंह

होठों से छू लो तुम,
मेरा गीत अमर कर दो,
बन जाओ मीत मेरे,
मेरी प्रीत अमर कर दो।

गुलजार साहब

प्यार कभी इकतरफ़ा होता है; न होगा
दो रूहों के मिलन की जुड़वां पैदाईश है ये
प्यार अकेला नहीं जी सकता
जीता है तो दो लोगों में
मरता है तो दो मरते हैं।

साहिर लुधियानवी

ताज तेरे लिए इक मज़हर-ए-उलफत ही सही
तुम को इस वादी-ए-रँगीं से अक़ीदत ही सही
मेरे महबूब कहीं और मिला कर मुझसे।


मैथिलि शरण गुप्ता

दोनों ओर प्रेम पलता है सखि, पतंग भी जलता है हा! दीपक भी जलता है!

सीस हिलाकर दीपक कहता ‘बन्धु वृथा ही तू क्यों दहता?’
पर पतंग पड़ कर ही रहता कितनी विह्वलता है दोनों ओर प्रेम पलता है।

 

हरिवंश राय बच्चन

प्यार किसी को करना लेकिन कह कर उसे बताना क्या, 
अपने को अर्पण करना पर और को अपनाना क्या।
गुण का ग्राहक बनना लेकिन गा कर उसे सुनाना क्या, 
मन के कल्पित भावों से औरों को भ्रम में लाना क्या।
ले लेना सुगंध सुमनों की तोड उन्हें मुरझाना क्या, 
प्रेम हार पहनाना लेकिन प्रेम पाश फैलाना क्या।

रिलेटेड पोस्ट