HOLI 2018: इसलिए ‘पहली होली’ ससुराल में नहीं मानती बहुएं

  By : Bhagya Sri Singh | February 28, 2018
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नई दिल्ली। होली रंगों और खुशियों का त्यौहार है। त्यौहार के बहाने एक दूसरे को रंग लगाने से स्पर्श के माध्यम से रिश्तों में करीबियां आती हैं वहीं उनमें एक नया स्पार्क भी पैदा होता है। ज्यादातर नवविवाहिताएं अपनी पहली होली ससुराल में नहीं मनाती हैं। त्यौहार से पहले ही वो अपने मायके चली जाती हैं। ये नियम हमारी परम्परा का ही हिस्सा है।

आपने घर के बड़े-बुजुर्गों से भी सुना होगा कि शादी के बाद लड़की होली खेलने के लिए अपने मायके में आ जाती है। लगभग हर हिन्दू परिवार में ये रस्म निभायी जाती है और होली से पहले ही नवविवाहिता का पति उसे मायके छोड़ आता है। ससुरालवाले नई नवेली दुल्हन के साथ काफी गिफ्ट्स और मिठाइयां भी भेजते हैं।

शादी के बाद लड़की अपनी पहली होली मायके में मनाती हैं, इसके बारे में आपने लोगों से सुना होगा। इसके अलावा लगभगर हर घर में इस परंपरा को निभाया जाता है कि शादी के बाद नवविवाहिता की पहली होली मायके में हो। आइए आज आपको बताते है बरसों से चली आ रही इस परम्परा के पीछे की वजह:

भारत में ऐसा माना जाता है कि शादी के बाद अगर नवविवाहिता लड़की अपनी पहली होली मायके के आंगन में खेलती है तो उसका वैवाहिक जीवन सुखमय व सौहार्द पूर्ण बीतता है।इसके पीछे एक और धारणा प्रचलित है कि शादी के बाद मायके में होली और पति से दूरी, उनके बीच के प्रेम को और बढ़ाती है।