बॉलीवुड के 10 पैरेंट्स जिन्हें आप अपनी जिंदगी में कभी नहीं चाहेंगे

By Team Khabare Jan 17, 2018 2:47 pm

‘अश्विनी सत्यदेव’

बॉलीवुड हमारी जिंदगी का वो हिस्सा बन चुका है जिसके बीना जिंदगी अधुरी सी लगती है। सिनेमा के रुपहले पर्दे के कई किरदार ऐसे हैं जिनके जैसा हम बनना चाहते हैं। या फिर कुछ किरदार ऐसे भी हैं जिन्हें हम अपनी जिंदगी में अपना दोस्त, ब्वॉयफ्रैंड, गर्लफ्रैंड, पत्नी या फिर पति के रुप में देखना चाहते हैं। लेकिन आज हम आपको बॉलीवुड के उन 10 पैरेंट्स से मिलायेंगे जिन्हें आप अपनी निजी जिंदगी में कभी नहीं पाना चाहेंगे। इन किरदारों ने अपने पात्रों को पर्दे पर कुछ ऐसा ​जीवंत किया था कि, आज भी उनकी धमक हमारे जेहन में जिंदा है। तो मीलिए उन 10 बड़े लेकिन थोड़े से रूखे पैरेंट्स से।

1- ‘बलदेव सिंह’
दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे

आॅल टाईम फेवरेट लव स्टोरी डीडीएलजे तो आप सभी को याद होगी ​ही, इस फिल्म में काजोल के पिता ‘बलदेव सिंह’ का किरदान निभाने वाले अमरीश पुरी ने पुरे फिल्म में अपने सख्त मिजाज से लोगों के दिल हमेशा दहलाते रहें। कोई भी अपने पिता में बलदेव सिंह का रुप नहीं देखना चाहेगा।

2- ‘यश रायचंद’
कभी खुशी गभी गम

अपने खास पारंपरिक नियमों और वसूलों पर कायम रहने वाले कभी खुशी कभी गम के एक कामयाब बिजनेसमैन ‘यश रायचंद’ को सब कुछ पसंद था लेकिन हैसियत के खिलाफ बेटे का प्यार नहीं। अमिताभ बच्चन ने इस किरदार को बखूबी निभाया और ये उनके यादगार पात्रों में से एक है।

3- ‘सुशीला’
मैं प्रेम की दिवानी हूं

बेटी की शादी की उलझनों से परेशान एक मां, हालांकि ये उनका स्वभाव था। लेकन दकियानुसी नियम कानूनों में अपनी मॉर्डन बेटी को बांधने की नाकाम कोशिश करती ‘सुशीला’ इस फिल्म के रोचक पात्रों में से एक है।

4- ‘वॉयरस’
थ्री ​इडियट्स

मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान की बेहतरीन फिल्म 3 इडियट्स के मशहूर पात्र ‘वॉयरस’ को भला कोई कैसे भूल सकता है। इस किरदार को बोमन ईरानी ने पर्दे पर कुछ ऐसा जीवंत किया कि, आज भी उनकी संवाद आदायगी और हमेशा गुस्से में रहने वाना विरू सहस्त्र बुद्धि ‘वॉयरस’ हमें याद आता है। वॉयरस जिसने महज अपनी जिद्द के चलते अपने बेटे को आत्महत्या करने के लिए मजबूर कर दिया, निश्चय ही कोई भी ‘वॉयरस’ जैसा पिता नहीं चाहेगा।

5- ‘मिसेज भामरा’
बेंड इट लाइक बेकहम

विदेशी धरती पर रहते हुए अपने आधुनिक बेटी के अरमानों का गला घोटनें वाली ‘मिसेज भामरा’ को भूलना बेहद ही मुश्किल है। एक पंजाबी परिवार की पुरानी बहू होने के नाते वो हमेशा चाहती हैं कि, उनकी बेटी केवल घर में चूल्हा चौका करे वहीं, उनकी बेटी फुटबॉल की एक बेहतरीन खिलाड़ी है और वो इस क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन करना चाहती है।

6- ‘भैरव’
उड़ान

उड़ान फिल्म के बेहद ही सख्त बाप भैरव को पर्दे पर देखकर कुछ ऐसा गुस्सा आया था कि, मानों अगर एक कत्ल माफ हो तो सबसे पहले भैरव का ही कत्ल कर दें। खैर इस किरदार को बेहतरीन एक्टर रोनित रॉय ने कुछ ऐसा पेश ही किया था। एक सनकी और शराब के नशे में धुत्त होकर नाकाम पिता जो हर वक्त अपने बेटे को प्रताणित करता रहता है, निसंदेह कोई भी ​अपनी रियल लाईफ में ऐसा पिता नहीं चाहेगा।

7- ‘कविता मल्होत्रा’
2 स्टेट्स

एक पंजाबी मां एक क्यूट स्मार्ट एमबीए बेटा और उसे इश्क हो जाता है, एक साउथ इंडियन लड़की से। अब ऐसे में दक्षिणी इडली और पंजाबी पराटे का तकरार होना तो लाजमी है। कुछ ऐसा ही इस फिल्म में भी देखने को मिलता है। प्रेमी जोड़ा अर्जुन कपूर और आलिया भट्ट पूरजोर कोशिश करते हैं कि उनके पैरेंट्स शादी के लिए राजी हो जायें लेकिन हर बार अर्जुन की मां कविता मल्होत्रा अपने बेरूखे शब्द बाणों से मामला खराब कर देती है।

8- ‘कमल मेहरा’
दिल धड़कने दो

एक कामयाब बिजनेसमैन के तौर पर अनिल कपूर ने इस फिल्म में ‘कमल मेहरा’ का किरदार बेहद ही शानदार तरीके से निभाया है। लेकिन एक बेरूखे पिता के तौर पर अपने बेटे की इच्छाओं की उपेक्षा करना और अपनी बेटी को अपनी कंपनी का नेतृत्व करने के लिए पर्याप्त योग्य नहीं मानना यही इनकी सबसे बड़ी खामी थी।

9- ‘अंगार चंद’
हलचल

हलचल के अंगार चंद शायद दुनिया के अपने टाईप के अकेले बाप होंगे, जिन्हें औरत जाति से ऐसी नफरत थी कि, उन्होनें आजीवन अपने बेटों की शादी न करने ​की भिष्म प्रतिज्ञा कर ली थी। इतना ही नहीं, अंगार चंद ने अपने घर के दरवाजे पर औरतों के प्रवेश की पाबंदी का बोर्ड भी लगाया था। मुझे नहीं लगता कि, कोई भी बेटा ऐसा पिता चाहेगा, जो आजीवन उसे कुवारा रखे।


10- ‘नंद किशोर अवस्थी’
तारे जमीन पर 

आमिर खान की फिल्म तारे जमीन पर, जिसमें दर्शिल सफारी ने इस फिल्म मे इशान अवस्थी का किरदार निभाया। जो कि, पढ़ाई लिखाई में कमजोर था। उसका मन किताबों से ज्यादा रंगों में लगता था। इशान को एक प्रकार की मानसिक समस्या थी वो दुनिया को अपने एक अलग हिसाब से देखता था। लेकिन इशान के पिता ‘नंद किशोर अवस्थी’ जो कि अपने बड़े बेटे की ही तरह छोटे बेटे में भी महत्वकांक्षाओं को खोजते थें। नंद किशोर आधुनिक युग के पिता है और इसीलिए वो अपने बेटे की मनोदशा समझने की बजाय उस पर बेवजह गुस्सा करना ही अपना कर्तव्य समझते है।

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