राफेल की उड़ान के साथ बढ़ती मित्रता

  By : Rahul Tripathi | March 15, 2018

राहुल त्रिपाठी

फ्रांससीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के हालिया भारतीय दौरे ने दोनों देशो के मैत्रीपूर्ण संबंधो में एक नया आयाम स्थापित किया है जो दोनों ही देशों के परस्पर आपसी सहयोग तथा कूटनीतिक संबंधों में उज्जव भविष्य का निर्धारण करेगा। भारत फ्रांस द्विपक्षीय संबंधों का दौर दो दशकों का है लेकिन दोनों देशों के बीच का इतिहास काफी पुराना है। वर्तमान समय में फ्रांस भारत का एक प्रमुख सैन्य सहयोगी देश है। इस संबंध का प्रारम्भ 80 के दशक में तब हुआ जब रूस ने भारत को मिग श्रेणी के उन्नत संस्करण को देने से इंकार कर दिया था। तब भारत ने फ्रांस से मिराज की खरीद की थी। उसी समय से फ्रांस भारत का विश्वसनीय सैन्य सहयोगी देश है।

राष्ट्रपति मैक्रों नें 11 मार्च को भारत के साथ 14 महत्वपूर्ण विषयों में समझौते किया। इस समझौते का सबसे महत्वपूर्ण पहलू, रक्षा के क्षेत्र में सहयोग की बनी सहमति है। जिसमें दोनों देश की नौसेनाओं का हिन्द-प्रशान्त में एक दूसरे के नौसैनिक बेसों का इस्तेमाल को लेकर है। इस क्षेत्र में चीन की बढ़ती हुई अधिकारवादी सक्रियता पर प्रभावी नियंत्रण के परिपेक्ष में दोनों देशों के बीच हुए इस समझौते का अलग ही महत्व है। साथ ही आतंकवाद पर सहयोग को लेकर भी भारत और फ्रांस के बीच सहमति बनी है। दोनों ही देश आतंकवाद से पीड़ित हैं और इससे मुकाबले के लिए एक एकीकृत कमान बनाने पर जोर दिया गया है। जो सूचनाओं के आदान प्रदान से लेकर कठोर समेकित कार्यवाही को करने में एक दूसरे का सहयोग करेगा।

भारत ने आतंक के बढ़ते प्रभाव का कठोरता से कुचलना प्रारम्भ कर दिया है। साथ ही विश्व के हर मंच से यह जता दिया है कि अब वह आतंकवाद को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगा। इसका उदाहरण संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई प्रतिनिधि सैयद अकबरउद्दीन के उस वक्तव्य में देखा जा सकता है जिसमें उन्होंने कहा है कि भारत अब किसी भी नापाक आतंकी करतूत को बरदास्त नहीं करेगा। फ्रांस भारत के इस कदम का समर्थन और सहयोग करेगा। भारत ने फ्रांस के साथ मिलकर अपनी सैन्य क्षमताओं का विकास कर रहा है जिससे आतंक को समर्थन देने वाले देशों को सबक सिखाया जाय।

गौरतलब है कि चीन भारत में कई आतंकी घटनाओं का मास्टर माइंड अजहर मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित करने के भारतीय प्रयास को संयुक्त राष्ट्र संघ में वीटो करके न केवल असफल कर दिया बल्कि सीमाओं पर सैन्य जमावड़ा बढ़ाकर भारत के सामने समस्या उत्पन्न कर रहा है। इसका जवाब सेना को मजबूत करके ही भारत दे सकता है। भारतीय सेना के आधुनिकीकरण तथा शक्तिशाली बनाने में फ्रांस बराबर मदद कर रहा है। जिसमें अत्याधुनिक लड़ाकू विमान राफेल तथा स्कार्पियन पनडुब्बी शामिल है।

अपने हालिया भारतीय दौरे में फ्रांस के राष्ट्रपति ने भारत के साथ अपने देश की सैन्य सहयोग को लेकर कहा कि अब समय आ गया है कि इस भागेदारी को बढ़ाकर नयी ऊंचाई देते हुए भारत के making India program के अन्दर लाकर बढ़ाया जाए। वैसे भारत 6 स्कार्पियन पनडुब्बी तथा 36 राफेल विमानों का निर्माण अपने यहां कर रहा है लेकिन फ्रांस चाहता है कि भारत इन सौदों को आगे बढाए और इसके लिए फ्रांस भारत के मेकिंग इंडिया प्रोग्राम में शामिल होकर काम करने को तैयार है। देखा जाये तो इसमें कोई बुराई भी नहीं दिखती क्योंकि भारत को इससे और अधिक अनुभव मिलेगा तो वहीं फ्रांस का बाजार बढ़ेगा। स्कार्पियन तथा राफेल दोनों ही अपनी श्रेणी में बेजोड़ हैं।

स्कार्पियन डीजल से चलने वाली अपनी श्रेणी की सर्वश्रेष्ट पनडुब्बी है। जिसको उथले पानी तथा तटीय युद्ध में महारत हासिल है। डीजल से चलने पर भी बहुत कम आवाज करती है साथ ही इसकी बनावट इस प्रकार की है कि तट के काफी नजदीक रहते हुए भी दुश्मन को इसकी उपस्थिति की भनक तक नहीं लगती। एक बार डीजल लेने के बाद यह40 आदमियों के साथ 50 दिनों के लिए समुद्र में रह सकती है।

यह एक मल्टी रोल पनडुब्बी है जो समुद्र से सतह तथा समुद्र से समुद्र तक मार करने वाली मिशाइल से लैस है। स्कार्पियन अपने साथ 18 तारपीड़ो और 30 सुरंगों को रखने की क्षमता रखती है। रास्ते में चलते हुए यह सुरंगों का जाल बिछाती है जिससे पीछा करने वाली पनडुब्बी इसमें पंस कर नष्ट हो जाती है। इसको ऐसे स्टील से बनाया गया है जिससे यह अधिक गहराई में जाने में सक्षम है।

अब तक भारत ने टेक्नोलाजी ट्रांफर के जरिये मुम्बई मंझगवां शिपयार्ड में तीन स्कार्पियन श्रेणी की पनडुब्बियों का निर्माण करके उनका जलावन्नतरण कर चुका है। जिनको INS कलावरी, INS खंडूरी तथा INS करेंज के नाम से भारतीय नौसेना में शामिल किया गया है। भारत अपनी सुरक्षा जरूरत को पूरा करने के लिए पिछले वर्ष सरकारी स्तर पर रक्षा समझौते पर फ्रांस की सरकार के साथ 36 राफेल विमानों का समझौता आधे दामों में किया था।

ये विमान विश्व के आधुनिकतम तथा सबसे महंगे लड़ाकू विमानों में से एक हैं। भारत लम्बे समय से ऐसे विमानों की आवश्कता को महसूस कर रहा था क्योंकि भारत का चीर प्रतिद्वंदी चीन पांचवी पीढ़ी के विमानों से लैस है। ये विमान हवा से जमीन पर हमला करने में माहिर हैं, ये जमीन पर स्थित निशाने पर 150 किलोमीटर दूर से अचूक निशाना लगा सकता है। इसमें 130 mm की एक गन भी लगी है जिससे यह हवा से हवा में हमला कर किसी भी जहाज या निशाने को पल भर में नष्ट कर सकता है।

भारती बेड़े में शामिल सबसे आधुनिक लड़ाकू विमान su 30 mki भी अपने बड़े आकर के कारण हवा से जमींन पर आक्रमण में उतने कारगर नहीं है साथ ही साथ ये चौथी पीढ़ी के विमान हैं। हवा से हवा में आक्रमण करने में आज भी इसका कोई सानी नहीं है। अतः हवा से जमीनी आक्रमण को और धारदार बनाने के लिए ऐसे विमानों की कमी लम्बे समय से महसूस की जा रही थी, जो राफेल के आने के बाद पूरी हो गई है।

इसके अलावा राफेल एक मिनट से भी कम समय में 60 हजार फीट की ऊंचाई प्राप्त कर लेता है जिससे ये पहाड़ी क्षेत्रों के युद्धा में महारथी हैं। क्योंकि भारत की सीमा का एक बहुत बड़ा क्षेत्र पहाड़ी है तथा भारत के सबसे बड़ा प्रतिद्वंदी चीन के साथ सीमा बनती है। अतः इसकी महत्ता और बढ़ जाती है।

इन विमानों के आ जाने से हमारी, दोनों प्रतिद्वंदी देशों पर सामारिक बढ़त हासिल हुई है और हम पहले से अधिक सुरक्षित हुए हैं। भारत सरकार द्वारा इन विमानों की तैनाती देश के सबसे पुराने और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हवाई अड्डा पठानकोट तथा बंगाल में किया जा रहा है। इसके लिए 220 करोड़ रुपये सरकार ने जारी किये हैं। अभी हाल ही में फ्रांसीसी रक्षा मंत्री फ्लोरेंस पार्ली ने अपने भारत दौरे में और अधिक राफेल विमान देना का प्रस्ताव रखा लेकिन भारत इसपर अभी शांत है। शायद इसका कारण प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस का राफेल सौदे पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाना है।