थप्पड़ कांड: तो क्या साजिश के तहत मुख्य सचिव को बुलाया गया था

  By : Team Khabare | February 21, 2018

अश्विनी ‘सत्यदेव’

नई दिल्ली। दिल्ली की कुर्सी पर आम आदमी पार्टी पूरी तरह काबिज है और संवैधानिक तौर पर उसकी जड़े भी मजबूत है, कहीं से भी सरकार के डगमगाने के कोई आसार नहीं है। लेकिन ऐसे में राजधानी में राज्य सरकार और एक मुख्य सचिव के बीच आखिर किस बात को लेकर तनातनी बनती है। बीते दिनों मुख्य सचिव अंशू प्रकाश ने आम आदमी पार्टी के विधायकों पर उनके साथ बदसलूकी और मारपीट किये जाने का आरोप लगाया। पहले तो ‘आप’ के विधायकों और खुद मुख्यमंत्री महोदय ने इस बात को बेबुनियाद और गलत बताया और बाद में आज खुद आरोपी विधायक अमानतुल्लाह खान ने नाटकीय ढंग से पुलिस के सामने अपनी गिरफ्तारी दी। वहीं दिल्ली पुलिस ने एक दिन पहले ही एक और आरोपी विधायक प्रकाश जरवाल को उनके घर से गिरफ्तार कर लिया था।

गिरफ्तारी को लेकर जो खेल पर्दे के सामने खेला गया उससे कहीं न कहीं साजिश की बू आ रही है। एक तो देर रात मुख्यमंत्री के आवास पर मीटिंग बुलाना और जिस मुद्दे को लेकर मीटिंग बुलाई गयी थी उस मुद्दे पर तो इस मीटिंग में बात ही नहीं हुई। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार ये मीटिंग घर-घर राशन पहुंचाने के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए बुलायी गयी थी। लेकिन आखिर ऐसा कैसे हो सकता है कि, जिस विषय को लेकर मीटिंग बुलायी जाये उस मुद्दे से जुड़ा सबसे अहम व्यक्ति ही इस मीटिंग में शामिल न हो।

खाद्य मंत्री ही थें नदारद:

आप थोड़ा कनफ्यूज हो रहे होंगे, लेकिन हम आपको बताते है। इस मीटिंग में खाद्य पदार्थों की आपूर्ति को लेकर चर्चा होनी थी। लेकिन स्वयं खाद्य मंत्री इमरान हुसैन ही इस मीटिंग में मौजूद नहीं थें। अब आप खुद सोच सकते हैं कि, जिस विभाग या विषय से जुड़ी बात पर चर्चा होनी हो उसका प्रमुख व्यक्ति ही बैठक में शामिल न हो तो फिर चर्चा किस बात और बिंदू पर होगी। ये सर्वविदित है कि चर्चा के बाद कुछ निष्कर्ष निकलते हैं तो आखिर उन निष्कर्षों पर अमल करने वाला भी तो मौके पर मौजूद होना चाहिए।

मुख्य सचिव का आरोप:

मुख्य सचिव अंशू प्रकाश ने इस मामले में आम आदमी पार्टी की विश्वसनियता पर ही सवाल खड़ा कर दिया है। अब ऐसा लगने लगा है कि, दिल्ली के मुख्यमंत्री के आवास पर यदि देर रात मीटिंग के लिए बुलावा आये तो शायद ही कोई बड़ा अधिकारी इसमें शामिल होगा। क्योंकि, मुख्य सचिव ने इस मामले में कहा है कि, इस मीटिंग में तय मुद्दे के बारे में कोई बातचीत नहीं हुई। बजाय इसके इस बैठक में दिल्ली सरकार के विज्ञापन के मुद्दे पर चर्चा हुई। यानी की राशन का लालीपॉप दिखाकर बुलायी गयी बैठक में चर्चा विज्ञापनों को लेकर हुई।

टकराव की वजह :

आपको बता दें कि, हाल ही में आम आदमी पार्टी ने अपनी तीसरी वर्षगांठ पूरी की। इस अवसर पर आम आदमी पार्टी टीवी पर विज्ञापन जारी करना चाहती थी। जिसे दिल्ली के प्रशासनिक अधिकारियों ने मंजूरी नहीं दी। इस विज्ञापन में किसी ‘दृश्य और अदृश्य’ शक्तियों जैसे शब्द को लेकर आपत्ति जतायी गयी थी, जिसके बाद विज्ञापन को जारी करने की अनुमति अधिकारियों ने नहीं दी। इस बात को लेकर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी अधिकारियों के प्रति रोष व्य​क्त किया था।

बैठक और व्यवस्था :

किसी भी बैठक में बैठने की जगह व्यक्ति के ओहदे के अनुसार होती है इससे बैठक और उसमें शामिल व्यक्ति दोनों की गरिमा का सम्मान प्रकट होता है। लेकिन दिल्ली के निजाम के घर देर रात लगने वाली इस सभा में जहां एक तरफ मुद्दे से जुड़ा मुख्य व्यक्ति नदारद था। वहीं इस बैठक में आम आदमी पार्टी के 11 विधायक शामिल थें और मुख्य सचिव अंशू प्रकार को दो विधायकों के बीच में बैठाया गया था। इस बात पर भी शक जाहिर किया जा रहा है कि, आखिर इतने बड़े ओहदे वाले अधिकारी को दो विधायकों के मध्य में क्यों बैठाया गया। जहां तक नैतिकता और कानून की बात है ये नियमों के अनुसार नहीं है। प्राप्त जानकारी के अनुसार इस बैठक में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, मुख्यमंत्री के सलाहकार वीके जैन, ओखला के विधायक अमानतुल्ला, अंबेडकर नगर के विधायक अजय दत्त, देवली से विधायक प्रकाश जारवाल और लक्ष्मी नगर के विधायक नितिन त्यागी शामिल थें।

ये जग जाहिर है कि, जिस दिन से आम आदमी पार्टी दिल्ली की सत्ता में आयी है। उस दिन से ही राज्य सरकार और नौकरशाहों के बीच खींचतान चल रही है। कभी कानून मंत्री को पुलिस वाला थप्पड़ मारता है तो कभी एलजी से केजरीवाल की भिडंत होती है। दिल्ली सरकार की कार्यप्रणाली को देखकर यही लग रहा है कि, ये सियासत भी किसी मदारी से कम नहीं है। इसके अलावा ये पूरा घटनाक्रम भी कहीं न कहीं इस पूरे मामले में शक की सुई ‘आप’ पर ही ले जा रहा है।