नेताजी सुभाष चंद्र बोस के खजाने का रहस्य?

  By : Rahish Khan | January 23, 2018 5:51 pm
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नई दिल्ली। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की हिंद फौज का खजाना लूटा गया था। इस बात का दावा लंबे समय से किया जा रहा है। लेकिन हकीकत में उनका खजाना किसने लूट इसका रहस्य आज भी बना हुआ है। बताया जाता है जब नेताजी सुभाष चंद्र बोस यात्रा कर रहे थे उस दौरान उनके साथ विमान में करीब 80 किलो सोने की ज्वैलरी थी। प्लेन क्रैश में नेताजी का पूरा सामान जल गया था, लेकिन उसमें से कुछ ज्वैलरी का हिस्सा बचा गया था। जिसे बाद में जापान भेज दिया गया। सन 1952 में इसे जापान से नई दिल्ली लाया गया। इसमें उस वक्त केवल 11 किलो ज्वैलरी का हिस्सा ही बचा था।  1945 में इसकी कीमत करीब 1 करोड़ रुपए बताई गई।

हाल ही में सार्वजनिक हुई एक रिपोर्ट्स में बताया कि इस लूट की जानकारी तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को थी। 03 नवंबर 1955 को नेहरु ने इस संबंध में संसद में शाहनवाज खान की अगुवाई में एक कमेटी गठित की थी। इस कमेटी में इंडियन नेशनल आर्मी के पूर्व मेजर जनरल शाहनवाज खान, सुभाष के बड़े भाई सुरेश चंद्र बोस और आईसीएस एस एन मैत्रा को शामिल थे। कुछ समय बाद इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट पंडित जवाहर लाल नेहरु को सौंपी थी। जिसमें इस खजाने की लूट के बारे में विस्तार से बताया गया था।

एक महिला दिए थे 13 नेकलेस दान

शाहनवाज कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार, नेताजी जापान में आजाद हिंद फौज का संचालन कर रहे थे। वो चाहते थे आजाद हिंद फौज को जापानी सोल्जर्स की कम से कम मदद लेनी पड़े। इसके चलते उन्होंने जापानियों द्वारा जीती गई ब्रिटिश कॉलोनियों में रह रहे 20 लाख भारतीय की मदद ली। ये मदद नियमित तौर पर आईएनए के पास पहुंचती थी, जिससे उनके पास बड़े पैमाने पर फंड इकट्ठा होने लगा। रिपोर्ट के मुताबिक 21 अगस्त 1944 को रंगून में पब्लिकली पैसे इकट्ठा करने के दौरान हीराबेन बेतानी नाम की एक महिला ने अपने 13 नेकलेस दान कर दिए थे। इनकी कीमत उस समय करीब 1.5 लाख रुपए थी। नेताजी की सरकार के राजस्व मंत्रालय ने इसके लिए एक अलग कमेटी बनाई, जिसे नेताजी फंड कमेटी नाम दिया गया। ताकि ये कमेटी सोना और अन्य बेशकीमती सामानों और आभूषणों को संभाल सके।

रंगून से बैंकॉक लेकर गए थे खजाना

रिपोर्ट में बताया गया कि जब नेताजी रंगून से बैंकॉक गए तो उनके साथ एक करोड़ रुपए से ज्यादा को खजाना था। उसमें ज्यादातर आभूषण और सोने की छड़ें थीं। इन्हें 17 छोटे लकड़ी के बॉक्सों में भरकर ले जाया गया था। जब नेताजी बैंकॉक से चले तो ये बहुमूल्य सामान करीब 17 बॉक्स में रखे थे। उन्हें फिर बडे सूटकेसों में भरा गया। हालांकि आयोग के सामने बताया गया कि जिस समय नेताजी बैंकॉक से रवाना हो रहे थे, तब खजाने को चार स्टील के अलग-अलग आकार वाले बॉक्स में पैक किया गया, ये नेताजी के सामने हुआ।

नेताजी नहीं ले जाना चाहते थे खजाना

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना था कि नेताजी के सामानों में बड़े सूटकेस थे, जिसमें दस्तावेज और करेंसी भी थी। हालांकि फंड को लेकर असंमजंस बना रहा, क्योंकि किसी को नहीं मालूम था कि नेताजी ने कितना पैसा निकाला और कितना खर्च किया और उनके पास कितना सोना और आभूषण हैं, जिसे वह लेकर जा रहे हैं। क्योंकि दस्तावेज मित्र सेनाओं के हाथों में पड़ने की डर से नष्ट कर दिए गए थे। कुल मिलाकर इतना ही कहा जा सकता है कि नेताजी ने इस आखिरी स्टेज में काफी बड़ी रकम का वितरण किया। अपने साथ कुछ कीमती सामान और आभूषण ले गए।

बॉक्सों की वजह से देर से उड़ा था विमान

रिपोर्ट्स में बताया गया कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस के आभूषण से भरे बॉक्स की वजह से उनके विमान की रवानगी डेढ घंटे लेट हो गई थी। इसे विमान में पायलट के विरोध के बाद भी रखा गया था। इस विमान यात्रा में नेताजी के साथ गए जापानी जनरल इसोदा ने शाहनवाज कमेटी को बताया कि उन्होंने मेजर हसन को ये कहते सुना था कि इन दो बाक्सों में नेताजी को पूर्वी एशिया के तीन लाख भारतीयों द्वारा दिए गए उपहार हैं। मेजर हसन का अनुमान था कि इसमें सोना और ज्वैलरी है। वैसे ज्यादातर प्रत्यक्षदर्शियों ने शाहनवाज कमेटी को इन बाक्सों को 30 इंच लंबा चमड़े का सूटकेस बताया लेकिन आईएनए के कैप्टन गुलजारा सिंह और कर्नल प्रीतम सिंह के अनुसार ये छोटे आकार वाले लकड़ी के बाक्स थे।

कैसे हुई नेताजी की मौत

सुभाष चंद्र बोस’ भारत के स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों में एक वो नाम हैं, जिसने अपने क्रांतिकारी तेवर की वजह से ब्रिटिश राज को हिलाकर रख दिया था। लोग उन्हें ‘नेताजी’ कहकर बुलाया करते थे। उन्होंने आजाद हिंद फौज के जरिए देश की आजादी में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत का रहस्य आज भी रहस्य ही है। बताया जाता है कि उनका देहांत 18 अगस्त 1945 को ताइवान में एक विमान हादसे में हुआ था। लेकिन इस बात की पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

नेताजी का जीवन परिचय

नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को उड़ीसा के कटक में एक बंगाली परिवार में हुआ था। नेताजी के पिता का नाम ‘जानकीनाथ बोस’ और माँ का नाम ‘प्रभावती’ था। जानकीनाथ बोस कटक शहर के मशहूर वकील थे। प्रभावती और जानकीनाथ बोस की कुल मिलाकर 14 संतानें थी, जिसमें 6 बेटियाँ और 8 बेटे थे। सुभाष चंद्र उनकी नौवीं संतान और पाँचवें बेटे थे। अपने सभी भाइयों में से नेताजी को सबसे अधिक लगाव शरदचंद्र से था। नेताजी ने अपनी शुरुआती पढ़ाई कटक के रेवेंशॉव कॉलेजिएट स्कूल से की और इससे आगे की पढ़ाई कलकत्ता के प्रेज़िडेंसी कॉलेज और स्कॉटिश चर्च कॉलेज से की। इसके बाद नेताजी भारतीय प्रशासनिक सेवा (ICS) की तैयारी के लिए इंग्लैंड के केंब्रिज विश्वविद्यालय चले गए।