मेरे पास मां है… वो अमर अल्फाज

  By : Team Khabare | December 4, 2017

अश्वनी ‘सत्यदेव’

मेरे पास गाड़ी है.. बंगला है.. बैंक बैलेंस है… तुम्हारे पास क्या है। मेरे पास … मां है। ये वो संवाद था जिसे सिनेमा के पहले पर्दे पर शशि कपूर ने जीवंत कर दिया था। इस संवाद के वो चार लफ्ज कि, ‘मेरे पास मां.. है  तो मानो जैसे अपने आप में ही बॉलीवुड की पूरी कहानी बयां कर देता है। 70 से 80 के दशक में शशि कपूर ने अपने शानदार अभिनय के बदौलत करोड़ों दिलों पर राज किया। लेकिन हिंदी सिनेमा का वो ध्रुव हमेशा के लिए अपने संवादों और अभिनय के यादों को हमारे जेहन में छोड़कर जा चुका है।

बेशक शशि कपूर हिंदी सिनेमा का एक शानदार गुल थें। सन 1971 में आयी फिल्म शर्मिली का वो गीत ‘खिलते हैं गुल यहां… मिल के बिछड़ने को’ आज भी लोगों के जेहन में जिंदा है। इस गीत को आवाज दी थी मशहूर गायक किशोर कुमार ने लेकिन शशि कपूर साहब ने इस गीत को 70 एमएम के पर्दे पर जीवंत कर दिया था।

हिंदी सिनेमा का वो दौर था जब इंसानी मजबूरी, सामाजिक समस्याओं, पारिवारिक तानों बानों पर फिल्में बना करती थीं। उस दौर में शशि साहब ने एक चॉकलेटी हीरो के तौर पर सिनेमा में अपना कदम रखा और पृथ्वी राज कपूर, शम्मी कपूर और राज कपूर के बाद कपूर खानदान का एक और चेहरा बॉलीवुड में अपना दम दिखाने आ चुका था।

हालांकि शशि कपूर ने बचपन से ही अभिनय करना शुरू कर दिया था। उन्होनें राज कपूर की मशहूर फिल्म आवारा में राज कपूर के बचपन का किरदार निभाया था। शशि के पिता पृथ्वीराज कपूर इनको अक्सर फिल्मों के स्टूडियों पर ले जाया करते थे और बचपन से ही इन्हें लाईट, कैमरा एक्शन का जो शुरूर चढ़ा वो आखिरी दम तक बरकरार रहा।

उस दौर में कुछ दिनों तक शशि कपूर ने कुछ आॅफ ​बीट फिल्मों में काम किया लेकिन उन्हें बॉलीवुड में असली पहचान दिलायी जब फूल खिले फिल्म की रीलिज के बाद हिंदी सिनेमा को एक शानदार चॉकलेटी हीरो मिला। ये वो दौर था जब हिंदी सिनेमा में पारिवारिक विवादों, जुर्म और एक्शन फिल्मों का सिक्का चलता था। ऐसे में एक शानदार रोमॉटिक फिल्म के साथ पहचान बनाना अपने आप में माइलस्टोन था।

जब जब फुल खिले अपने समय की सबसे बड़ी हिट फिल्म साबित हुई और इस फिल्म का वो गीत कि, ‘परदेशियों से ना अंखिया मिलाना… परदेशियों को तो है इक दिन जाना..’ आज भी लोगों के होठों की ठंडी तासीर बना हुआ है। इस फिल्म के बाद शशि कपूर ने यश चोपड़ा की मल्टी स्टॉरर फिल्म वक्त में काम किया। जिसमें अपने समय के दिग्गज अभिनेता बलराज साहनी, राज कुमार, सुनील दत्त जैसे कलाकार पर्दे पर उनके सामने थे।

इस फिल्म में एक बार फिर से देश की आवाम के सामने शशि कपूर का शानदार अभिनय था, और लोगों के दिलों में शशि साहब ने घर करना शुरू कर दिया था। इसके बाद चॉकलेटी हीरो की छवि से निकल कर शशि कपूर को ​वो फिल्म मिली जिसका संवाद उनका सिग्नेचर स्टाइल बन गया। शशि कपूर ने अपने समय के शिर्ष पर रहने वाले एंग्री यंग मैन अमिताभ बच्चन के साथ दीवार फिल्म में काम किया।

कसी हुई पटकथा, शानदार अभिनेताओं और अपने समय के वजूद से जुड़ी हुई दीवार जब सिनेमा के रूपहले पर्दे पर खड़ी हुई तो हिंदी सिनेमा के मायने ही बदल गये। फिल्म का वो दृश्य जैसे आज भी आखों के सामने तैर जाता है जब अमिताभ बच्चन और शशि कपूर के बीच संवाद होता है और शशि साहब एक क्रोधित भाई के सुलगते हुए सवालों का बड़ी ही नरमी से जवाब देते हैं … ‘मेरे पास मां है।’

बस फिर क्या था पब्लिक से खचा खच भरा हुआ थियेटर मानों झूम उठा था। उस दौर में ग्रामीण क्षेत्रों में इस फिल्म के प्रचार के लिए खास लहजे का इस्तेमाल हुआ करता था।… गोलियों की गड़गड़ाहट, पायलों की झंकार और तालियों के गूंज के बीच दिखाया जा रहा है रोजाना चार शो.. दीवार… दीवार..दीवार।

आज भले ही शशि कपूर हमारे बीच में नहीं है लेकिन उनका वो झूमते हुए मेरे भाय… कहना, सड़क पर मोटरसाइकिल से फर्राटा भरते हुए …इक रास्ता है जिंदगी .. जो थम गयें तो कुछ नहीं, गीत गाना और उनकी वो बोलती आखें हमेशा के लिए हमारे जेहन में जिंदा रहेंगी। खबरी डॉट काम सहृदय शशि कपूर साहब को श्रद्वांजलि अर्पित करता है।