जल्द ही आपकी रसोई से गायब हो जायेगा LPG सिलेंडर

  By : Team Khabare | February 10, 2018

अश्विनी ‘सत्यदेव’

नई दिल्ली। रसोई घर का राजा एलपीजी सिलेंडर बहुत जल्द ही नदारद होने वाला है। इसके लिए केंद्र सरकार एक प्रभावी योजना पर तेजी से काम कर रही है। अब सरकार देश में एलपीजी सिलेंडरों के प्रयोग के बजाय सौर उर्जा के प्रयोग पर बल देगी। अब तक देश में एलपीजी की खपत सबसे ज्यादा होती थी, इसी को ध्यान में रखकर केंद्र सरकार इस योजना पर काम कर रही है।

सरकार ने इसके लिए एक्शन प्लॉन भी तैयार कर लिया है और इस योजना की शुरूआती प्रयोग शाला मध्य प्रदेश बन रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीएम नरेंद्र मोदी के निर्देश के बाद मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान इस योजना पर काम करना शुरू कर चुकी है। इस योजना में मुंबई आईआईटी के प्रोफेसरों के साथ मध्य प्रदेश सरकार के अफसरों और एक्सपर्टों को शामिल किया गया है।

ये कमेटी इस योजना पर काम कर रही है कि, आखिर किस तरह से देश भर में एलपीजी के प्रयोग के बजाय सौर उर्जा के प्रयोग को शुरू किया जाये। गौरतलब हो कि, एलपीजी प्रोपेन और ब्यूटेन के मिश्रण को कहते हैं और ये दोनों ही काफी महंगी गैस है।

कहां से शुरु हुई योजना:

विश्व स्तर पर इस सबसे महंगे ईधनों में से एक प्रोपेन और ब्यूटेन के संरक्षण की योजना बन रही है। वहीं भारत की आबादी इस बात के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है। चूकिं दुनिया भर में अन्य देशों के मुकाबले भारत में एलपीजी का प्रयोग भारी मात्रा में किया जाता है। इसलिए भारत सरकार के उपर ये जिम्मेदारी आन पड़ी है कि, वो किसी तरह देश में एलपीजी के भारी दोहन पर लगाम लगाये।

इसके लिए विकल्प के तौर एलपीजी की जगह सौर उर्जा के प्रयोग को सरकार बल देगी। आपको याद दिला दें कि, केंद्र सरकार ने देश के कई हिस्सों में एलपीजी के पाइप लाइनों की योजना भी शुरू की थी। जिसमें देश की राजधानी दिल्ली सबसे तेजी से एलपीजी पाइप लाइनों का प्रयोग कर रही थी। लेकिन बीते वर्षों से राजधानी में पाइप लाईन एलपीजी के प्रयोग में भी सरकार ने कटौती की है।

भारत में क्यों है जरूरी:

दुनिया के कई देशों में एलपीजी के प्रयोग को सिमित कर दिया गया है। लेकिन भारत में अभी भी एलपीजी गैस का प्रयोग भारी मात्रा में होता है। हाल ही में सरकार ने उज्जवला योजना की शुरूआत की थी जिसके बाद देश में एलपीजी का प्रयोग और तेजी से होने लगा। अब सरकार अपनी इस योजना पर भी लगाम लगाने की सोच रही है। वहीं दूसरे देशों की बात करें तो अन्य देशों में एलपीजी के बजाय सौर उर्जा और इंडक्शन कूकर चलन तेजी से बढ़ रहा है।

भारत में भी बड़े शहरों में इंडक्शन और सौर उर्जा का प्रयोग बढ़ रहा है। लेकिन ये अभी भी काफी कम है। यदि इसी तरह देश में एलपीजी का प्रयोग होता रहा तो इसकी कीमत में इजाफा होना स्वाभाविक है।

क्या होता है एलपीजी:

एलपीजी में मुख्यतः प्रोपेन और ब्यूटेन गैसें होती हैं जबकि प्राकृतिक गैस में मुख्यतः मिथेन और इथेन गैसे होतीं हैं जो अपेक्षाकृत हल्की गैसे हैं। एलपीजी का कैलोरिफिक मान 94 MJ/m3 (26.1kWh/m³) होता है जब्कि प्राकृतिक गैस (मिथेन) का कैलोरिफिक मान 38 MJ/m3 (10.6 kWh/m3) होता है। एलपीजी अतिज्वलनशील होता है, इससे धमाके होने का खतरा भी बढ़ जाता है। ये कहना गलत नहीं होगा कि, आज के समय में देश के हर घर में एक बम रखा गया है। हालांकि ये सुरक्षित है और हम इसके आदि भी हो चुके है। लेकिन कई दुर्घटनाओं में इसके प्रमुख वजह बनने से हम इंकार भी नहीं कर सकते है।

विचारणीय:

इस बात पर हम सभी को विचार करना चाहिए, और जल्द से जल्द एलपीजी से मुक्त होकर सौर उर्जा और अन्य विकल्पों की तलाश करनी चाहिए। हालांकि शुरूआती दौर में सौर उर्जा महंगा जरूर है लेकिन इसका ​भविष्य काफी बेहतर और सुरक्षित है। वहीं इंडक्शन कूकर का भी हम प्रयोग कर सकते हैं, कई शहरों में इसका प्रचलन तेजी से बढ़ रहा है। यदि संयमित तरीके से इंडक्शन कूकर का इस्तेमाल किया जाये तो इससे कम खर्च में प्रयोग में लाया जा सकता है।