देश की सीमाओं पर खतरनाक होते हालात 

  By : Rahul Tripathi | January 21, 2018 4:09 pm
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राहुल त्रिपाठी

हमारे देश की सीमाओं में इन दिनों बढ़ता हुआ तनाव खतरनाक मोड ले चुका है और हालात कभी भी नियंत्रण से बाहर हो सकते हैं। पिछले कई दिनों से देश के पश्चिमी सीमा में पाकिस्तान द्वारा भयानक गोलाबारी की जा रही है। भारत की लगभग 40 सीमा चौकियां इस गोलाबारी से प्रभावित है। पाकिस्तान जानबूझकर फायरिंग का निशाना निर्दोष ग्रामीणों को बना रहा है।जिसकी वजह से हर दिन लगातार लोग हताहत हो रहे हैं। लगभग 5000 ग्रामीणों को सीमावर्ती क्षेत्रों से हटाकर सुरक्षित स्थानों में पहुंचाया गया है। वहीं दूसरी तरफ देश की उत्तरी सीमा भी चीन की बढ़ती आक्रमता का शिकार हो रही है। इसकी गंभीरता का अहसास देश के सेनाध्यक्ष के उस वक्तव्य में देखा जा सकता है जिसमें उन्होंने कहा कि समय आ गया है कि अब हमारा ध्यान देश की पश्चिमी सीमा से हटकर उत्तरी सीमा पर होना चाहिए।

हालांकि पाकिस्तान से होने वाली दु:साहस का हमारी सेना द्वारा माकूल जवाब दिया जा रहा है जिसके कारण पाकिस्तानी सेना को भयंकर नुकसान झेलना पड़ रहा है। उसकी कई सीमा चौकियां नष्ट कर दी गयी हैं। हर दिन पाकिस्तान को अपने सैनिकों को खोना पड़ रहा है। सीमापार क्षेत्रों में तेजी से घूमते एम्बुलेंस इस बात को प्रमाणित करते हैं। देश के गृहमंत्री ने पड़ोसी देश को चेताते हुए कहा था कि पहली गोली हमारी तरफ से नहीं चलेगी लेकिन अगर हमें मजबूर किया गया तो हम इसका भरपूर जवाब देंगे और इसके लिए गोलियां नहीं गिनेंगे।

कुल मिलाकर भारत की जवाबी कार्रवाई के बाद स्थितियां काफी खतरनाक मोड़ ले चुकी हैं। क्या कारण हैं कि सीमा पर इस तरह की खतरनाक परिस्थितियां बन गयी हैं? पहले भी पाकिस्तान की तरफ से सीमा पर गोलाबारी की जाती थी लेकिन ऐसी स्थित नहीं बनी। इस प्रश्न को एक उत्तर के जरिए नहीं समझा जा सकता। इसको समझने के लिए हमें कई स्थितियों पर दृष्टिपात करना होगा। अकसर देखा गया है कि जब भी कोई महत्वपूर्ण विदेशी राष्ट्राध्यक्ष भारत की यात्रा पर आता है तो पाकिस्तान कश्मीर की समस्या पर ध्यानाकर्षण के लिए सीमा पर गोलाबारी करता है जिससे कश्मीर की समस्या का अन्तर्राष्ट्रीयकरण किया जा सके। ये अलग बात है कि वह अपने प्रयास में सफल नहीं हो पाता। विश्व पाकिस्तान की हकीकत को समझ चुका है और वह उसके किसी भी झांसे में नहीं आने वाला। कुछ़ समय पहले पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र के अधिवेशन में कश्मीर की समस्या को उठाने का प्रयास किया। लेकिन वह अपने प्रयास में सफल नहीं हो सका और उसके प्रतिनिधि को वहां अपमानित भी होना पड़ा।

लेकिन पाकिस्तान है कि सुधरता ही नहीं। अभी हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने पाकिस्तान को दी जाने वाली अमेरिकी सैनिक सहायता पर रोक लगा दिया है क्योंकि उसने आतंकवादियों पर प्रभावी रोक न लगाकर केवल उसके नाम पर अमेरिकी आर्थिक सहायता ले रहा था। राष्ट्रपति ट्रम्प ने कठोर शब्दो में चेतावनी देते हुए पाकिस्तान को आतंकवादियों पर प्रभावी रोक लगाने को कहा लेकिन पाकिस्तान ऐसा करेगा यह बहुत मुश्किल है। क्योंकि वह आतंकवाद को अपनी विदेश नीति का हिस्सा मानता है।

आतंकवादियों को कश्मीर में दाखिल कराने के लिए पाकिस्तान सीमा पर फायरिंग करता है। जब से भारतीय सेना कश्मीर से आतंकवादियों को पूरी तरह से समाप्त करने के लिए आपरेशन आल आउट चला रही है और इसमें वह पूरी तरह से सफल भी हो रही है। अब तक सेना तथा जम्मू कश्मीर पुलिस ने मिलकर लगभग 250 आतंकवादियों को मार दिया, जिसके कारण कश्मीर में आतंकवाद काफी कमजोर हो गया है। साथ ही साथ NIA ने पाकिस्तान के टेरर फंडिग के सहारे घाटी में आतंक को चलाने वाले अलगाववादियों पर कानूनी शिकंजा कसकर आतंकवाद की जड़ों पर जबरदस्त प्रहार किया है।

जिसके कारण कश्मीर घाटी में आतंकवाद कमजोर होकर अपनी अंतिम सांसे गिन रहा और वह इस समय काफी दबाव में है। तब से पाकिस्तान कश्मीर में आतंकवाद को मजबूत करने के लिए आतंकवादियों की नयी खेप भारत में पहुंचाने के लिए सीमा पर लगातार गोलाबारी कर रहा है। लेकिन भारतीय सेना काफी सतर्क है और वह दुश्मन की किसी भी दु:साहस का मुहतोड़ जवाब देने के लिए तत्पर है। शायद इसीलिए सीमा पर खतरनाक स्थितियां उत्पन्न हो गयी हैं।

अपने मित्र पाकिस्तान को इस संकट से उबारने के लिए चीन ने भारत के उत्तरी सीमा में अपनी हलचल काफी बढ़ा दिया, जिसका परिणाम है डोकलाम विवाद। हालांकि यह विवाद तीन महीना पुराना है जिसको आपसी बातचीत के जरिए सुलझा लिया गया था लेकिन हाल ही में सेटलाइट से लिए गये चित्रों से पता चला है कि चीन की उत्तरी डोकलाम में सक्रियता काफी बढ़ गई है। उसने वहां अस्थाई निर्माण कर लिया है। शायद इसीलिए हमारे सेनाध्यक्ष ने अपने वक्तव्य में इसका इशारा किया था।
यह कहना मुश्किल है कि चीन ये सब पाकिस्तान के लिए किया लेकिन इससे इनकार भी नहीं किया जा सकता।

चीन का भारत से इस समय उलझने के अपने कई कारण भी हैं। भारत चीन की वन बेल्ट वन पॉलिसी का लगातार विरोध कर रहा है। साथ ही दक्षिणी चीन सागर में चीनी आधिपत्य के दावे का भारत क्षेत्रीय देशों की चिंताओ से सहमत है और अमेरिका के साथ मिलकर चीन का विरोध कर रहा है। अत: चीन डोकलाक के मुददे पर, भारत पर दबाव बनाकर अपना हित साधना चाहता है और भारत को अपने झंडे के नीचे लाना चाहता है। लेकिन यह इतना आसान नहीं, भारत एक ताकतवर देश और अपने हितों की रक्षा करने में सक्षम है। चीन भी इस बात को जानता है वह तनाव को युद्ध के स्तर तक नहीं ले जा सकता और न भारत को ताकत से दबा सकता है। अंतत: सीमा पर बढ़ता तनाव युद्ध तक जाएगा इसकी सम्भावना नहीं दिखती।