पाकिस्तान पर ट्रंप की नरमी के क्या हैं मायने?

  By : Abhishek Tiwari | October 14, 2017 10:00 pm
donald trump america paris climate agreement

अभिषेक तिवारी, नई दिल्ली।

अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहली बार पाकिस्तान को लेकर नरमी बरतते हुए अच्छे रिश्तों की बात कही है। अब तक पाक के खिलाफ जहर उगलने वाले अमरीकी राष्ट्रपति का हृदय परिवर्तन क्यों हुआ है यह सोचने वाली बात है।

ट्रंप ने ट्विटर पर शनिवार को लिखा कि पाकिस्तान और वहां के नेताओं से रिश्ते बेहतर करने की शुरुआत कर रहे हैं। कई मोर्चों पर हमारा साथ देने के लिए मैं पाकिस्तान का शुक्रिया अदा करना चाहूंगा। राष्ट्रपति ट्रंप ने इस पर कहा कि मैंने खुलकर कहा है कि पाकिस्तान ने सालों तक हमारा जबरदस्त फ़ायदा उठाया है। लेकिन अब हम पाकिस्तान के साथ वास्तविक संबंधों की शुरुआत कर रहे हैं। पाकिस्तान अमरीका का फिर से सम्मान कर रहा है।

इन ट्वीट्स के बाद अमरीका से लेकर भारत और पाकिस्तान तक चर्चा होने लगी। पाकिस्तान ने इसे अपना जीत माना। वहीं कुछ लोग इसको अमरीका की पाकिस्तान के साथ पुरानी नीतियों की नई शुरुआत मान रहे हैं। हालांकि लोगों को उम्मीद थी कि ट्रंप पाक से आतंकवाद के मुद्दे पर सख्ती से निपटेंगे।

यह नई शुरुआत किस दिशा में और कहा तक जाएगी यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा लेकिन इसके पीछे की जो मंशा है वह पहले से अलग होगी इस पर शक है। दरअसल, अमरीकी-कनाडाई परिवार को आज़ाद कराए जाने को लेकर पाकिस्तान की कोशिशों का इसे तोहफा माना जा रहा है। इस परिवार को हक्कानी नेटवर्क ने कैद रखा था। सीआईए की खुफिया जानकारी पर पाक ने इस परिवार को उनके कैद से आजाद कराने में अहम भूमिका निभाई।

ये तो रही एक बात, दूसरी और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ट्रंप की चाहत थी कि भारत दक्षिण एशिया में बड़ी भूमिका अदा करे। जिसमें अफगानिस्तान से लेकर चीन और पाक तक पर अमरीकी नीतियों में भारत से समर्थन की उम्मीद जताई गई थी। ट्रंप ने खुद कहा था कि भारत को अफगानिस्तान में बड़ा रोल प्ले करना चाहिए।

पिछले दिनों ही अमरीकी रक्षा मंत्री भारत के दौरे पर आए थे। उन्होंने भारत की रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात में अफगानिस्तान में शांति बहाली तक सेना भेजने का का आग्रह किया था। जिसे भारत ने स्वीकार नहीं किया।

अमरीका को अफगानिस्तान में टिके रहने के लिए पाकिस्तान की जरूरत है। उसकी कोशिश थी कि पाकिस्तान की जगह इस काम के लिए भारत का सहारा लिया जाए लेकिन भारत के इंकार के बाद अमरीका और राष्ट्रपति ट्रंप के पास पाक के अलावा कोई विकल्प नहीं था।

हमेशा पाक की आलोचना करने वाले ट्रंप पाक को छोड़ना भी नहीं चाहते थे क्योंकि जिस तरह से वहां पर चीन की पैठ बढ़ रही है वह अमरीका के लिए बड़ी चिंता है। अमरीका को ये भी लग रहा है कि कही चीन पाक को अमरीका के खिलाफ इस्तेमाल न करने लगे, जैसा वह और देशों के साथ करता है। अमरीका उत्तर कोरिया वाली स्थिति से बचना चाहता है। उत्तर कोरिया मामले में अमरीका इसीलिए कड़ाई नहीं बरत रहा है क्योंकि उसे मालूम है कि चीन और रूस उसकी खिलाफत करेंगे।

जानकार मानते हैं कि अमरीका की पाक पर नरमी का भारत पर कुछ असर नहीं पड़ने वाला। पिछले कुछ सालों में भारत और अमरीका हर मुद्दे पर करीब आए हैं। निवेश से लेकर संबध तक में गर्मजोशी देखने को मिल रही है। भारत ने वैश्विक मंच से भी अपनी हर स्थिति को स्पष्ट तौर पर पेश किया है। अमरीका भारत के बड़े बाजार को खोना नहीं चाहता है। इसके अलावा चीन की ताकत को रोकने के लिए उसे भारत की हर समय जरूरत पड़ेगी इस बात को भी अमरीका बखूबी समझ रहा है। यही कारण है कि पाक पर ट्रंप की नरमी का भारत और अमरीका की नीतियों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। अमरीका कभी नहीं चाहेगा कि भारत जैसा विश्वस्त देश उससे दूर चला जाए।