वैकल्पिक ऊर्जा: पवन ऊर्जा की नई शक्ति ‘भारत’

  By : Rahul Tripathi | August 21, 2018 5:04 pm

राहुल त्रिपाठी
देश ने वैकल्पिक ऊर्जा के उत्पादन में आशातीत सफलता प्राप्त की है, विशेष रूप से पवन ऊर्जा के क्षेत्र में भारत विश्व का चौथा बढ़ा उत्पादक बन गया है। देश की बढ़ती आर्थिक विकास की जरूरतों को पूरा करने के लिए ऊर्जा की बड़ी मात्रा में आवश्यकता है। देश की सरकार ने 2050 तक ऊर्जा के क्षेत्र में आत्म निर्भरता का लक्ष्य रखा है। जिसमें वैकल्पिक ऊर्जा स्रोता की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होगी। पवन ऊर्जा के क्षेत्र में देश की यह उपलब्धि इस लक्ष्य की प्राप्ति में काफी मदद देने वाली है।

हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार भारत विश्व का चौथा बड़ा पवन ऊर्जा उत्पादक देश है। जबकि इस रिपोर्ट में चीन को पहला, अमेरिका को दूसरा और जर्मनी को तीसरा स्थान दिया गया है। भारत में पवन ऊर्जा के उत्पादन में समुद्री तटीय राज्यों का एकाधिकार है। सर्वाधिक पवन ऊर्जा राज्य कर्नाटक है, जबकि गुजरात का स्थान दूसरा है। वास्तव में समुद्र तटीय राज्यों में पवनों के प्रवाह में निरंतरता रहती है। जिसके कारण विंडस टरबाइन को घूमने में मदद मिलती है। जिससे ऊर्जा का उत्पादन होता है।

दरअसल, देश में ऊर्जा की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए सरकार ने ऊर्जा स्रोतों के नए विकल्पों के विकास पर ध्यान केन्द्रित किया है। अभी तक देश की ऊर्जा जरूरतों को कोयला आधारित संयंत्रों से पूरा किया जा रहा है। लेकिन इससे होने वाला प्रदूषण और उपलब्धता का सीमित होने के कारण सरकार दूसरे अक्षय ऊर्जा स्रोतों के विकास पर ध्यान दे रही है। एक अनुमान के अनुसार यदि इसी तरह कोयले का दोहन होता रहा, तो अगले 40 सालों में कोयले का भण्डार भारत में खत्म हो जाएगा।

अत: भारत सरकार ने भविष्य की ऊर्जा की आवश्यकताओं को देखते हुए वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत के विकास का निर्णय लिया है। पूर्ववर्ती सरकार के समय में अमेरिका, फ्रांस, कनाडा, आस्ट्रेलिया तथा रूस के साथ परमाणु ऊर्जा संयंत्रों को लगाने के लिए समझौते किए गए हैं। साथ ही वर्तमान सरकार के द्वारा सौर्य ऊर्जा के विकास के लिए भी प्रयास किया जा रहा है। सोलर पैनल को खरीदने में सब्सिडी तथा बैंक से लोन जैसे प्रयासों के द्वारा इसके प्रयोग को प्रोत्साहित करना का प्रयास किया जा रहा है।

इसके अतिरिक्त केन्द्र सरकार सोलर एनर्जी के विकास के लिए दूसरे देशों के साथ मिलकर काम कर रही है। हाल ही में फ्रांस सरकार की मदद से उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में 90 मेगावाट क्षमता का सौर्य ऊर्जा संयंत्र लगाया गया है। इसके साथ ही गुजरात, पंजाब, उत्तराखण्ड, तमिलनाडु, तेलंगाना, कर्नाटक और ओडिशा जैसे राज्यों में वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के विकास के अतिरिक्त प्रयास किए जा रहे हैं।

भारत में पवन ऊर्जा के विकास का इतिहास 1986 से प्रारम्भ होता है। सर्वप्रथम महाराष्ट्र, गुजरात और तमिलनाडु में पवन ऊर्जा संयंत्र लगाए गए। जिनकी कुल ऊर्जा उत्पादन क्षमता 55 मेगावाट थी। पवन ऊर्जा संयंत्रों को नवीन ऊर्जा मंत्रालय के द्वारा संचालित किया जा रहा है। मंत्रालय ने 2022 तक 60 लाख मेगावाट ऊर्जा के उत्पादन का लक्ष्य रखा है। सरकार का वैकल्पिक ऊर्जा संसाधनों के विकास के द्वारा कई लक्ष्यों को साधने का इरादा है।

नये वैकल्पिक और अक्षय ऊर्जा के विकास से भारत में क्लीन एनर्जी के विकास के लक्ष्य की प्राप्ति के साथ ही लाखों नई नौकरी के अवसर प्राप्त होंगे। एक रिपोर्ट के अनुसार इन क्षेत्रों में आने वाले 10 सालों में करीब 12 लाख नौकरियों के अवसर बनेंगे। अत: आने वाले समय में पर्यावरण की स्वच्छता के साथ ही भारत की बढ़ती बेरोजगारी दोनों का समाधान वैकल्पिक ऊर्जा संसाधनों के विकास की सफलता पर निर्भर करेगी।