भारतीय विदेश नीति के शिल्पी ‘अटल जी’

  By : Rahul Tripathi | August 17, 2018 5:28 pm
A Tru Leader Atal ji, Atal Bihari Vajpayee died

राहुल त्रिपाठी

भारतीय राजनीति के ध्रुवतारा पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी हमारे बीच नहीं रहे। वे मौत के अनन्त गहराईयों में सदा के लिए विलीन हो गए हैं। लेकिन एक महान व्यक्तित्व वाले राजनेता, व्यक्ति और एक शक्तिशाली प्रधानमंत्री के रूप में वह हमेशा इतिहास के पन्नों में स्वर्णिम अक्षरों से अंकित रहेंगे। उनके महान व्यक्तित्व का यह आकर्षण है कि विश्व के कई देशों के नेता उनके अंतिम दर्शन के लिए भारत आए हैं। जिसमें श्रीलंका के विदेश मंत्री के साथ-साथ हमारे प्रतिद्वंदी देश पाकिस्तान के राजनयिक भी अटल जी के अंतिम दर्शन के लिए आए। भूटान के नरेश जिंगमें खेसर और अफगानिस्ता के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ने उन्हें अंतिम विदाई दी है। इसके अतिरिक्त नेपाल, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के राजनयिक भी अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किए है।

वास्तव में अटल बिहारी वाजपेयी को भारतीय विदेश नीति में कई नये आयामों को स्थापित करने के लिए जाना जाता है। भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के विदेश नीति को आगे ले जाने का श्रेय अगर किसी को जाता है, तो वे अटल बिहारी ही थे। उन्होंने समय के साथ भारतीय विदेश नीति में बदलाव किया। पहले जहां हमारी विदेश नीति में गुटनिरपेक्ष की विचारधारा का प्रभाव था। साथ ही नेहरू का रूस के सामाजवाद के प्रति आर्कषण का प्रभाव, हमारे देश की विदेशनीति में भी था। लेकिन शीतयुद्ध की समाप्ति के साथ ही विश्व की स्थितियां काफी बदल गई।

अटल बिहारी ऐसे पहले प्रधानमंत्री थे जिन्होंने अमेरिका और भारत के संबंधों को मजबूत करने का दूर-दर्शितापूर्ण फैसला लिया था। दोनों देशों के साझा लोकतांत्रिक मूल्यों को आधार बनाकर उन्होंने भारत के आर्थिक और सामरिक समृद्धि का प्रयास किया। मौजूदा समय में भारत-अमेरिका के बीच हर मोर्च पर हो रही साझेदारी के पीछे अटल जी की ही सोच थी। जिसने भारत के आर्थिक विकास के साथ-साथ वैज्ञानिक, तकनीकी और सामरिक विकास की आधारशिला रखी है।

अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने भी अपने देश की तरफ से शोक संदेश में कहा है कि अमेरिका-भारत के बीच वर्तमान संबंधों के पीछे अटल बिहारी की ही सोच है। जिस पर चलकर दोनों ही महान लोकतांत्रिक देश आर्थिक और सुरक्षा के क्षेत्र में परस्पर विकास कर रहे हैं। आगे भी इसी साझा प्रयास के जरिए विश्व में शांति और समृद्धि लाने का प्रयास करेंगे। अटल जी का यह मानना था कि मित्र बदले जा सकते हैं लेकिन पड़ोसी नहीं बदले जा सकते हैं। इसलिए उन्होंने पाकिस्तान के साथ संबंध को सामान्य करने का प्रयास किया।

देश में पाकिस्तान से वार्ता को लेकर भारी विरोध के बावजूद उन्होंने पाकिस्तान से संबंधों को सामान्य करने का प्रयास किया। इसके लिए वे बस से लाहौर की यात्रा पर गए और पाकिस्तान से शांतिकायम करने का प्रयास किया। साथ ही उन्होंने कहा कि पाकिस्तान से तबतक संबंध ठीक नहीं हो सकते, जबतक वह कश्मीर पर अपना दावा करता रहेगा। कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और हमेशा रहेगा। उन्होंने पाकिस्तान को चेतावनी दी कि उसको कश्मीर का मोह त्याग देना चाहिए। साथ ही अटल जी का यह मानना था कि पाकिस्तान को दुनिया में मित्रविहीन बना देना चाहिए। आज पाकिस्तान कामोवेश ऐसी ही स्थित में पहुंच गया है।

अटल जी ने वर्षों से चली आ रही पश्चिम एशिया की नीति में एक बड़ा बदलाव करते हुए इजराइल के साथ संबंधों को प्रगाढ़ करने का फैसला किया और उसे एक मुकाम दिया। जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इजराइल की यात्रा पर गए तो यह उसी अटल नीति का ही विस्तार था। अटल जी ने पूर्वी देशों के साथ ही संबंधों को प्रगाढ़ करने के लिए सराहनीय प्रयास किया। आज मोदी की लुक एक्ट नीति, अटल जी की ही नीति है, जिसे आगे बढ़ाने का प्रयास जारी है।

अटल जी का मानना था कि शक्तिशाली होकर ही हम अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा कर सकते हैं। अत: उन्होंने देश को आर्थिक और सैन्य दृष्टि से शक्तिशाली बनाने का प्रायास किया। उन्होंने देश को शक्तिशाली बनाने के लिए परमाणु परीक्षण का फैसला किया। साथ ही देश के आर्थिक विकास के लिए स्वर्णिम चतुर्भुज जैसी योजनाओं को प्रारम्भ किया। उनके समय में ही भारत ने 8.4 प्रतिशत की विकास दर को हासिल किया। भारत का यही महान शिल्पी आज सदा के लिए पंचतत्व में विलीन हो गया है।