रघुराम की नीतियों की वजह से विकास दर घटी: नीति आयोग

  By : Rahish Khan | September 3, 2018 5:15 pm
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नई दिल्ली। नीति आयोग ने विकास दर में गिरावट के लिए आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने सोमवार को कहा है कि रघुराम राजन की नीतियों की वजह से सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पर असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि नोटबंदी को इसके लिए जिम्मेदार ठहराना बिल्कुल गलत है।

राजीव कुमार ने कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं है कि नोटबंदी और विकास दर गिरावट के बीच कोई संबंध है। उन्होंने कहा कि अगर आप विकास दर के आकंड़ों को देखेंगे तो पाएंगे कि यह नोटबंदी की वजह से नहीं था, बल्कि छह तिमाही से यह लगातार नीचे जा रहा था। इसकी शुरुआत 2015-16 की दूसरी तिमाही से हुई थी, जब विकास दर 9.2 फीसदी थी। लेकिन इसके बाद विकास दर घटती गई। यह एक ट्रेंड का हिस्सा था, नोटबंदी का विकास दर में गिरावट का कोई सबूत नहीं है।

विकास दर घटने की वजह एनपीए

नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने आगे कहा कि विकास दर के घटने की एक बड़ी वजह बैंकिंग क्षेत्र का बढ़ता एनपीए है। बीते 3 साल के दौरान विकास दर में गिरावट बैंक के एनपीए में हुई बढ़ोत्तरी है। उन्होंने कहा कि जब मोदी सरकार ने सत्ता संभाली, तब बैंकों का एनपीए 4 लाख करोड़ रुपये था। लेकिन मार्च 2017 तक यह NPA बढ़कर 10.5 लाख करोड़ का आंकड़ा पार कर गया। एनपीए में हुई बढ़त के चलते पिछले तीन साल में जीडीपी में लगातार गिरावट देखने को मिली और इसके लिए जिम्मेदार रघुराम राजन की नीतियां थीं।

जीडीपी विकास दर में आया उछाल

बता दें कि वित वर्ष 2018-19 की पहली तिमाही (अप्रैल से जून) के दौरान जीडीपी विकास दर 8.2 रही है। इससे पहले बीते वर्ष 2016-17 की पहली तिमाही में विकास दर 8 फीसदी रही थी। लिहाजा, लगातार 8 तिमाही की सुस्ती के बाद एक बार फिर विकार दर में बड़ा सुधार दर्ज किया गया। वहीं इन तीन वर्षों के दौरान 5.7 फीसदी की न्यूनतम जीडीपी विकास दर दर्ज हुई।