जाने कब और कैसे रखे जन्माष्टमी का व्रत?

  By : Akash Kumar | August 30, 2018 2:38 pm

नई दिल्ली। हर साल की तरह इस साल भी भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की तैयारियां बड़ी जोरशोर से चल रही हैं। जन्माष्टमी भादो (सितंबर) महीने की कृष्ण अष्टमी को मनाया जाता है। इस बार भगवान का जन्म 2 और 3 सितंबर को मनाया जायेगा। इस दिन ज्यादात्तर लोग उपवास रखते हैं। साथ ही भगवान कृष्ण के जन्म के बाद ही व्रत तोड़ते हैं।

बता दें कि भगवान कृष्ण का जन्म भादो माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी के रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। हमारे हिंदू समाज के लोग गिरधारी, मुरली बजईया का जन्मदिन बड़े उत्साह औऱ धूमधाम से मनाते हैं। इस साल जन्माष्टमी दो सितंबर की रात 8:47 से शुरु होगी, जबकि रोहिणी नक्षत्र 8:48 पर लगेगा। इसलिए व्रत 2 सितंबर को रखा जाएगा और अगले दिन यानी कि 3 सितंबर को रात 8:05 मिनट पर रोहिणी नक्षत्र समाप्‍त होगा। रोहणी नक्षत्र समाप्त होने के बाद व्रत का पारण होगा।

कैसे रखे व्रत?

– जन्‍माष्‍टमी का व्रत रहने के लिए एक दिन पहले केवल एक समय का भोजन करना चाहिए।

– जन्‍माष्‍टमी के दिन सुबह स्‍नान करने के बाद व्रत का संकल्‍प लें।

– इसके बाद माता देवकी के लिए भगवान को जन्म देने के लिए एक सूतिका गृह बनाएं।

– इस सूतिका गृह में माता देवकी समेत बाल गोपाल की मूर्ति स्थापित कर पूजा शुरु करें।

– इस व्रत में आप दिन में पानी, फल और दूध ले सकते हैं।

– जन्‍माष्‍टमी की पूजा का समय 2 सितंबर 2018 की रात 11 बजकर 57 मिनट से रात 12 बजकर 48 मिनट तक है।

– रोहिणी नक्षत्र के खत्‍म होने के बाद व्रत का पारण करें।

जन्‍माष्‍टमी की पूजा के लिए सामग्री

जन्‍माष्‍टमी की पूजा के लिए आवश्यक सामग्री चौकी, लाल वस्‍त्र, बाल गोपाल की मूर्ति, गंगाजल, मिट्टी का दीपक, घी, रूई की बत्ती, धूप, चंदन, रोली, अक्षत, तुलसी ,पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का मिश्रण) मक्खन, मिश्री, मिष्ठान/नैवैद्य, फल, बाल गोपाल के लिए वस्‍त्र, श्रृंगार की सामग्री (मुकुट, मोतियों की माला, बांसुरी और मोर पंख), इत्र, फूलमाला, फूल और बालगोपाल के लिए पालना।