जुलाई में सदी का सबसे लंबा चंद्रग्रहण, प्रलय की भविष्यवाणी

By Bankatesh Kumar Jun 29, 2018 4:56 pm

नई दिल्ली। इस साल जुलाई महीने में 21वीं सदी का सबसे लंबा खग्रास चंद्रग्रहण लगने वाला है। इस ग्रहण का सबसे ज्यादा असर चार राशियों पर पड़ेगा। खगोल शास्त्रियों के अनुसार पहला चंद्रग्रहण 13 जुलाई को पड़ेगा। जबकि सूर्यग्रहण 11 अगस्त को होगा। इसे खंडग्रास सूर्यग्रहण कहेंगे। इस दिन लोगों को कुछ खास बातों का ध्यान रखना होगा। तो आइए जानते हैं खंडग्रास सूर्यग्रहण के बारे में।

विद्वानों की मानें तो दो ग्रहणों में इस खग्रास चंद्रग्रहण का काफी बुरा असर पड़ेगा। खग्रास चंद्रग्रहण पड़ने से कर्क रेखा के मध्य वाले क्षेत्रों को विनाशकारी भूकंप, सुनामी, चक्रवात, ज्वालामुखी का फटने जैसी आपदाओं का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा पृथ्वी की कक्षा के अन्दर के तमाम देशों के हजारों सैटेलाइट्स खराब हो सकती हैं।

बता दें कि इससे पहले भी खंडग्रास सूर्यग्रहण पड़ा था। इसी की वजह से नेपाल में इस साल आधा दर्जन से ज्यादा प्लेन क्रैश हुए हैं। वहीं एक साल के अन्दर इसरो के दो सैटेलाइट लांच फेल हो गए हैं। चीन का स्पेस स्टेशन गिर गया। रुस का एक उपग्रह भी खो गया है।

ज्योतिष शास्त्रियों के अनुसार साल 2017 और 2018 में ग्लेशियर टूटने से लेकर भूकंप की कई बड़ी घटनाओं की भविष्यवाणी पहले से ही की गई है। वैज्ञानिकों ने अपने रिसर्च में बताया है कि हाल के कुछ वर्षों में पृथ्वी की गति में कमी आई है। जिसके कारण भूकंप की घटनायें बढ़ी हैं। बता दें कि 27 जुलाई को पड़ने वाला चंद्रग्रहण 6 घंटा 14 मिनट तक रहेगा। इसमें पूर्ण चंद्रग्रहण 103 मिनट तक रहेगा।

भारत में यह चंद्रग्रहण रात को 11 बजकर 55 मिनट पर शुरु होगा और लगभग 3 बजकर 54 मिनट तक अपने पूर्ण आकार में आ जाएगा। ऐसे में पृथ्वी के मध्य क्षेत्र की छाया चंद्रमा पर पड़ेगी। इसके आगे-पीछे के अमावस्याओं पर खग्रास चंद्रग्रहण पड़ेगा। इसकी वजह से पृथ्वी को काफी नुकसान होगा।

बता दें कि इससे पहले 26 जुलाई 1953 को सबसे लम्बा चंद्रग्रहण पड़ा था। जिसके कारण ग्रीस में भीषण भूकंप आया था। यह ग्रहण 5 घंटा 27 मिनट तक रहा था। जिसमें 101 मिनट तक पूर्ण चंद्रग्रहण था। 

इस ग्रहण के बाद अगस्त में ग्रीस के केफलोनिया और जाकिनथोस में लगभग 113 बार भूकंप आया था। इसमें सबसे ज्यादा विनाशकारी भूकंप 12 अगस्त को लोनियन आइसलैंड में आया था। जिसकी तीव्रता 7.2 मैग्निट्यूड स्केल मापा गया था। इसमें कई बड़ी इमारते ढ़ह गई और 800 लोगों की मौत हो गई थी।

कर्क रेखा में आने वाले देशों के नाम भारत, बांग्लादेश, म्यांमार, चीन, ताइवान, अमेरिका का हवाई द्वीप, मैक्सिको, बहामास, मुरितानिया, माली, अल्जीरिया, नाइजर, लीबिया, चाड, मिस्त्र, सउदी अरब, येएई, ओमान देश हैं।

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